समय तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा का

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी ने एलान कर दिया है कि वह मध्यप्रदेश में विधानसभा के दो दर्जन सीटों पर होने वाले उपचुनावों में हर सीट पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष रमाकांत पिप्पल के इस कार्यकाल की यह सबसे बड़ी घोषणा है। दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में ही ऐसी तमाम घटनाओं का सूत्रपात हुआ था कि विंध्य से लेकर ग्वालियर-चम्बल वाले उत्त्तरप्रदेश से लगे इलाकों में बहुजन समाज पार्टी ने विजय हासिल कर राज्य में तीसरे दल के तौर पर सशक्त मौजूदगी दर्ज करवा दी थी। हालांकि बाद में मध्यप्रदेश बाद में बसपा के लिए बंजर जमीन ही साबित हुआ। प्रदेश में बसपा की दुर्गति होने के बावजूद इतना तो उसका असर रहा ही कि वो छह-फीसदी अपना वोट लगभग कायम किए हुए है। लिहाजा, इस दल ने अपनी अहमियत बरकरार रखी

राज्य में गए दिनों हुए सियासी उलटफेर में दिग्विजय सिंह के चिरंजीव जयवर्द्धन सिंह हरियाणा पहुँची बीएसपी विधायक रामबाई का बैग खुद ढोते हुए दिखे, ताकि सरकार बचाई जा सके। पार्टी के तमाम दिग्गज इसी दल के दूसरे विधायक संजीव कुशवाह की गणेश परिक्रमा करते हुए भी नजर आए। पर बसपा के ये दोनों विधायक कमलनाथ सरकार के लिए पिघल नहीं पाए। पिप्पल ने यह घोषणा की, उसके ठीक पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर बेहद तीखे अंदाज में कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने उत्त्तरप्रदेश में चल रही ‘बस पॉलिटिक्स’ मे भाजपा का समर्थन करते हुए कांग्रेस की जमकर निंदा की। बहनजी की यह पीड़ा उन अशोक भाईसाहब (राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत) से जुडी हुई है, जिन्होंने उस राज्य में बीएसपी के सभी विधायकों को तोड़कर अपनी तरफ कर लिया है। किसी भी किस्म की पराजय को किसी भी सूरत में आसानी से पचा सकने के मामले में मायावती का हाजमा जरा कमजोर है।

वे उसी सूरत में लकड़-पत्थर हजम कर पाती हैं, जब पिछले अपमान भुलाने में उनके लिए भविष्य का भारी फायदा होना तय हो। बहनजी बीते समय से राजनीति में असफलताओं से जूझ रही हैं और निकट भविष्य में उनके लिए शुभ-लाभ के पट आसानी से खुलते नहीं दिख रहे। इसलिए मुमकिन है कि ऐसा होने तक वह कांग्रेस के लिए अपने गुस्से का ईंधन जलाये रखें। दूसरी बात यह भी है कि बसपा हो या सपा, ये दोनों दल उत्तरप्रदेश में सिर मार रही प्रियंका और कांग्रेस को किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेंगे। कारण यही है कि आखिर ये दोनों क्षेत्रीय दल पनपे तो कांग्रेस के वोट बैंक में ही सेंध लगाकर है। सवाल यह कि बसपा के इस रौद्र रूप का क्या भाजपा को कोई लाभ मिलेगा? जिन सीटों पर उपचुनाव हैं, वहाँ शिवराज और ज्योतिरादित्य का चेहरा ही मुख्य भूमिका अदा करेगा। चुनाव में मुख्य मुकाबला भी भाजपा तथा कांग्रेस के बीच ही होना तय है।

लेकिन ग्वालियर-चंबल संभाग की सौलह विधानसभा सीटों पर तो बसपा, हम भी खेलेंगे, नहीं तो खेल बिगाड़ेंगे, की तर्ज पर कई जगह बड़ा खेल कर सकती है। खासकर जातिगत समीकरणों वाली सीट्स पर हाथी का जादू चलने की पूरी संभावना है, वह भी इस सूरत में कि वोटकटवा वाली राजनीति से बीएसपी दोनों प्रमुख दलों की नींद उड़ा सके। फिर भी मान कर चलें कि ज्यादा नुकसान कांग्रेस के खाते में दर्ज होना है। कारण, भाजपा को अपनी सरकार बचाए रखने के लिए केवल नौ विधानसभा क्षेत्रों में जीत दर्ज करनी है। कांग्रेस को सत्ता में लौटने के लिए सभी 24 विधानसभा सीटें जीतनी है। ये बसपा मैदान में नहीं होती, तब भी नामुकिन सा टास्क ही है। बसपा ने वोट काटने से लेकर खेल बिगाड़ने की राजनीति में खासी महारत हासिल कर रखी है और मुमकिन है कि नतीजों के बाद वह अपने इसी गुण का बड़ा लाभ उठा सके।

यह दांव उस समय और महत्वपूर्ण हो जाता है, जब यह साफ है कि बहुत बड़ी संख्या में मतदाता बीते मार्च की सियासी उठापटक को लेकर कांग्रेस और भाजपा, दोनों से ही खासे खफा हैं। उनके गुस्से को भुनाने का बसपा तगड़ा जरिया बन सकती है। कांग्रेस में कई जगह बगावत के सुर गूंज रहे हैं। भाजपा खेमे में भी अनेक स्थानों से ऐसी ही खबरें आ रही हैं। पूर्व मंत्री दीपक जोशी ‘इधर चला, मैं उधर चला’ का गाना गाकर सत्तारूढ़ दल की नींद उड़ाने में लगे हुए हैं। कांग्रेस में अजय सिंह धमकी दे रहे हैं कि यदि मेहगांव से चौधरी राकेश सिंह को टिकट दिया गया तो वे पार्टी छोड़ देंगे। इसके चलते प्रमुख विपक्षी दल के भीतर भी खेमेबाजी चरम पर पहुंचती दिख रही है। हालात ने यदि और गंभीर रूप लिया तो उनका लाभ बीएसपी को मिलना तय है। तीसरी ताकत के रूप में अन्य छोटे दलों के मुकाबले ‘तिलक, तराजू और तलवार’ वाली पार्टी ने ही यहां सबसे अधिक ताकत हासिल की है। साफ है कि प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य आने वाले दिनों में और रोचक रूप लेने जा रहा है। बचपन में तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा खूब सुना था। राजनीति में भी यह अक्सन देखने को मिल ही जाता है। लगता है इस बार मध्यप्रदेश में सरकार का भविष्य तय करने वाले निर्णायक उपचुनावों में यह देखने को मिल जाए।

प्रकाश भटनागर/वेब खबर से साभार

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