सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, कहा-बुलेट ट्रेन भी क्या पानी में चलाओगे

मुंबई: मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर मनपा प्रशासन, रेल प्रशासन और राज्य सरकार की नाकामी पर नाराजगी जताते हुए बांबे हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। मुंबई में भारी बरसात के कारण पुल हादसे और रेल पटरियों पर जमा पानी को देखकर कोर्ट ने राज्य सरकार और रेलवे प्रशासन से कहा कि बिना तैयारी के बुलेट ट्रेन किस तरह चलाई जाएगी। क्या पानी में बुलेट ट्रेन चलाने का विचार है। इसी के साथ ही कोर्ट ने समुद्री यातायात के साथ अन्य विकल्पों पर भी विचार करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अंधेरी पुल दुर्घटना को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि इस तरह की परिस्थितियों से निबटने के लिए राज्य सरकार के साथ ही केंद्र सरकार को तैयार रहना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि प्राकृतिक आपदाओं अथवा भीषण हादसों के दौरान मुंबई की लाइफ-लाइन समझी जानेवाली लोकल सेवा के बाधित होने पर महिला यात्रियों को सबसे ज्यादा तकलीफ होती है, उनकी सुविधाओं के लिए भी ठोस प्लान बनाने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई अगस्त में होगी। बता दें कि मुंबई में लोकल ट्रेनों और बेस्ट बसों पर ही आम मुंबईकर निर्भर रहते हैं। बढ़ती जनसंख्या और बढ़ते भ्रष्टाचार के कारण जहां प्रशासन इन सेवाओं को सही तरीके से चलाने में नाकाम हो रहा है तो वहीं, भारी बरसात से लोकल ट्रेनों का आवागमन बाधित हो जाता है। इससे लाखों रेल यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई घंटे तक ट्रेनों में ही रहने को विवश होना पड़ता है। बांबे हाईकोर्ट में बुनियादी सेवाओं के संदर्भ में लापरवाही बरतने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ ही राज्य सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की गई थी।

लोकल ट्रेनों में यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कोर्ट ने महिला यात्रियों की सुरक्षा व सुविधाओं को लेकर चिंता जताई। बरसात या हादसे के दौरान सबसे ज्यादा तकलीफ महिला यात्रियों को ही होती है। कोर्ट ने रेल प्रशासन से कहा है कि लोकल ट्रेनों में महिला यात्रियों के लिए प्रथम श्रेणी का एक स्वतंत्र कोच लगाने पर विचार किया जाए। बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मुंबई और उसके आसपास के जिलों में मौजूदा स्थिति को देखते हुए नवी मुंबई की तर्ज पर एक नए शहर को बसाना जरूरी हो गया है। शहर की बढ़ती जनसंख्या, बढ़ती वाहन ट्रैफिक व पार्किंग की समस्या के लिए नए शहर की संकल्पना ठोस उपाय के रूप में कारगर साबित हो सकती है। राज्य सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। रेलवे प्रशासन को भी कोर्ट ने फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि हर साल पहली बरसात में ही रेल पटरियों पर पानी जमा हो जाता है, सिग्नल व्यवस्था बिगड़ जाती है, रेलवे मानसून से पहले कोई भी काम नहीं कर रही है।

रेलवे को भी रेल यात्रियों की समस्याओं के निराकरण के लिए ठोस उपाय योजनाओँ के साथ अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अगस्त में होनेवाली अगली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, राज्य के महाधिवक्ता और रेलवे विभाग के वकील को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। न्यायाधीश नरेश पाटील और न्यायाधीश गिरीष कुलकर्णी की खंडपीठ ने मुंबई की लोकल सेवाओं को सुचारू करने के लिए स्वतंत्र रेल्वे व्यवस्थापन बोर्ड के गठन कर सभी अधिकार देने के संदर्भ में भी रेलवे को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार को इस संदर्भ में संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर बैठक आयोजित करने को कहा गया है। अगली सुनवाई अगले महीने होगी। हालांकि राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि गोराई से चर्चगेट और नवी मुंबई से मुंबई के बीच जल यातायात जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा।

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