सरकार चलाने में रहे नाकाम प्रधानमंत्री केपी ओली की कुर्सी, बड़े नेताओं ने मांगा इस्तीफा

काठमांडू: चीन के इशारे पर चलने वाले और भारत विरोधी भावनाओं को हवा दे रहे नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कुर्सी डगमगा रही है। कम्युनिस्ट पार्टी के दूसरे अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ सहित वरिष्ठ नेताओं ने ओली से इस्तीफा मांग लिया है। स्टैंडिंग कमिटी के एक सदस्य के मुताबिक, दहल, माधव कुमार नेपाल, झालानाथ खनल और बामदेव गौतम ने मंगलवार को कहा कि ओली सरकार चलाने में नाकाम रहे हैं, इसलिए पद छोड़ें। ओली से प्रधानमंत्री के अलावा पार्टी अध्यक्ष का पद भी छोड़ने को कह दिया गया है।

गौरतलब है कि केपी शर्मा ओली की सरकार विवादों में घिर रही है। कुशासन, भ्रष्टाचार और अब कोविड-19 को लेकर नाकामी को लेकर ओली जनता और विपक्ष के साथ ही पार्टी के दूसरे नेताओं के निशाने पर रहे हैं। ओली ने भारतीय इलाकों को शामिल करते हुए देश का नया नक्शा जारी किया। उन्होंने राष्ट्रवाद के सहारे अपने खिलाफ उठती आवाजों को दबाने का प्रयास किया, लेकिन माना जा रहा है कि वह अपनी कुर्सी नहीं बचा पाएंगे।

‘भारत नहीं, हम मांग रहे हैं इस्तीफा’
कुर्सी पर खतरा भांपते हुए केपी शर्मा ओली ने दो दिन पहले आरोप लगाया था कि देश का नया नक्शा जारी करने की वजह से नई दिल्ली और काठमांडू में उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। उन्हें पद से हटाने की साजिश रची जा रही है। मंगलवार को स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में प्रचंड ने ओली से कहा कि भारत नहीं बल्कि वह खुद (प्रचंड) पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद से उनका इस्तीफा मांग रहे हैं। स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य के मुताबिक, प्रधानमंत्री ओली से यह सबूत भी मांगा कि उन्हें पद से हटाने के लिए साजिश रची जा रही है।

ओली ने भारत पर निकाली थी भड़ास
नाकामियों की वजह से हाथ से छूट रही सत्ता के लिए केपी शर्मा ओली ने भारत पर भड़ास निकाली थी। ओली ने कहा है कि उनकी कुर्सी छीनने के लिए नई दिल्ली और काठमांडू में साजिश रची जा रही है। उन्होंने इसके लिए नक्शा विवाद को वजह बताया है। हालांकि सच्चाई यह है कि चीन के बेहद करीबी ओली के लिए चीन से आया वायरस ही कुर्सी से गिराने वाला बड़ा कारण बन गया है।

क्या कहा था ओली ने?
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में अल्पमत में आ चुके केपी ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा, ”देश का नया नक्शा जारी करने और संसद से इसे पास कराने की वजह से मेरे खिलाफ साजिश रची जा रही है। बुद्धिजीवियों की चर्चा, नई दिल्ली से मीडिया रिपोर्ट्स, दूतावास की गतिविधियों और काठमांडू के अलग-अलग होटलों में चल रही बैठकों से, यह समझना मुश्किल नहीं है कि किस तरह लोग मुझे हटाने के लिए खुलकर एक्टिव हैं। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिलेगी।”

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