सरकार ने आखिरकार मान लिया, देश की विकास दर चालू कारोबारी साल में महज पांच फीसदी रह जाएगी

नई दिल्ली. सरकार ने भी आखिरकार मान लिया कि देश की विकास दर चालू कारोबारी साल में महज पांच फीसदी रह जाएगी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने मंगलवार को चालू कारोबारी साल के लिए जीडीपी का पहला अग्रिम अनुमान पेश किया। मंत्रालय ने अपने अनुमान में कहा कि चालू कारोबारी साल में देश की विकास दर महज पांच फीसदी रह जाएगी। पिछले कारोबारी साल 2018-19 में देश की विकास दर 6.8 फीसदी थी।

इससे पहले आरबीआई ने देश की विकास दर के अपने अनुमान को घटाकर पांच फीसदी कर दिया था। चालू कारोबारी की पहली तिमाही की विकास दर 5 फीसदी और दूसरी तिमाही की विकास दर 4.5 फीसदी दर्ज किए जाने के बाद कई रेटिंग एजेंसियों और अग्रणी वित्तीय संस्थानों ने भी पूरे कारोबारी साल में देश की विकास दर काफी कम रहने की आशंका जताई थी। कुछ एजेंसियों ने तो यह भी कह दिया था कि देश की विकास दर पूरे कारोबारी साल में गिरकर 4.7 फीसदी रह सकती है।

विकास का अनुमान मुख्यत: मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के खराब प्रदर्शन की आशंका से घटाया गया है। अग्रिम अनुमान के मुताबिक मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की विकास दर चालू कारोबारी साल में महज 2 फीसदी रह सकती है। पिछले साल इस सेक्टर की विकास दर 6.9 फीसदी रही थी।

सरकार के ताजा अनुमान के मुताबिक चालू कारोबारी साल में कई अन्य सेक्टर की विकास दर भी घटेगी। इनमें कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन सेक्टर की विकास दर पिछले साल के 2.9 फीसदी से घटकर 2.8 फीसदी पर आ सकती है। इसी तरह से बिजली, गैस, जल आपूर्ति व अन्य युटिलिटी सेवाओं की विकास दर 7 फीसदी से घटकर 5.4 फीसदी रह जाने की आशंका है। निर्माण क्षेत्र की विकास दर 8.7 फीसदी से घटकर 3.2 फीसदी आ आ सकती है। वित्तीय, रियल एस्टेट व पेशेवर सेवाओं की विकास दर 7.4 फीसदी से घटकर 6.4 फीसदी पर आ सकती है।

वास्तविक आधार (2011-12 की कीमत पर) पर चालू कारोबारी साल में देश की प्रति व्यक्ति आय 96,563 रुपए रहने का अनुमान है, जो 2018-19 में 92,565 रुपए थी। इस आधार पर प्रति व्यक्ति आय की विकास दर इस साल 4.3 फीसदी रह सकती है, जो पिछले कारोबारी साल में 5.6 फीसदी थी।

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