सर्वेक्षण में हुआ खुलासा, 50 फीसदी लड़कियां बाहर होने वाली छेड़छाड़ नहीं बताती

भोपाल: 50 प्रतिशत लड़कियां बाहर होने वाली छेड़छाड़ को घर में नहीं बताती हैं, क्योंकि उनका आना-जाना बंद हो जाएगा। 52 फीसदी लड़कियां स्थानीय बाजारों में खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं, जबकि 47 फीसदी बालिकाओं को लगता है कि सार्वजनिक परिवहन उनके लिए सुरक्षित नहीं है। यह बात सामने आई है सेव द चिल्ड्रन संस्था द्वारा किए गए सर्वे में। इस संस्था द्वारा वर्ष 2018 में सार्वजनिक स्थानों पर बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर एक अध्ययन मध्यप्रदेश सहित देश के 6 राज्यों में किया है।

शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में किए गए इस सर्वे में यह बात सामने आई। जारी की गई सर्वे रिपोर्ट में बताया गया कि सर्वे में 36 फीसदी लड़कियों ने कहा कि संकरे रास्ते और स्कूल के पास उन्हें डर लगता है। 25 फीसदी लड़कियों को स्कूल, बाजार या कोचिंग का रास्ता सुरक्षित नहीं लगता। वहीं 18 फीसदी लड़कियां खुले में शौच के लिए जाती है। ऐसा करते समय वे असुरक्षित महसूस करती हैं। कार्यक्रम में सुदेश गौड़ ने कहा कि रिपोर्ट में यह देखकर बहुत दुख हो रहा है कि लड़कों की सोच आज भी नहीं बदली है।

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इस रिपोर्ट के मुताबिक 73 लड़कों का मानना है कि महिलाओं का काम खाना बनाना और बच्चों का पालन-पोषण करना है। यह चिंता का विषय है कि आज भी लड़के ऐसी सोच रखते हैं। उन्होंने कहा कि आज के बाजार प्रधान दौर में बचपन को भी कमोडिटी के रूप में देखा जा रहा है, जबकि जरूरत है कि हम उन्हें व्यक्तियों की तरह देखें। हमें बच्चों की दुर्दशा के लिए समाज और सरकार जिम्मेदारी को तय करने की जरूरत है। समाज हम और आप हैं। समाज में जो कुछ भी महिला या बच्चों के साथ हो रहा है उसके लिए हम जिम्मेदार हैं। हालांकि मीडिया समय-समय पर अपनी भूमिका निभाता है, लेकिन समाज की जवाबदारी ज्यादा बनती है।

डॉ. राघवेन्द्र शर्मा ने कहा कि मानवीय संवेदनाओं की कमी के कारण बच्चे असुरक्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाधान कानून से नहीं, बल्कि समाज की जागरूकता से निकलेगा। जब भी हमें किसी बच्चे के साथ कुछ असामान्य दिखे तो उससे जरूर बात करें। हम अपने बच्चों से भी उनकी दिनभर की गतिविधियों के बारे में बात करने की आदत डालें। नगर निगम परिषद अध्यक्ष सुरजीत सिंह चौहान ने कहा कि रिपोर्ट सच्चाई के काफी करीब है। घरेलू जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए पुरुषों को भी महिला का सहयोग करना चाहिए।

महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक सुरेश तोमर ने कहा कि हमारे समाज में गैरबराबरी हमेशा से रही है। लैंगिक हिंसा भी इसका एक हिस्सा ही है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी को सेफ सिटी बनाए जाने की जरूरत है। एक तिहाई लड़कों को लगता है कि लड़कियां लड़कों की नौकरी छीन रही हैं। एक तिहाई से अधिक लड़कों को लगता है कि लड़कियों के साथ थोड़ी बहुत मारपीट तो चलती है। 40 प्रतिशत लड़कियों को लगता है कि पुलिस के पास जाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। वे असहज भी महसूस करती हैं।

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