सांप अपनी केंचुली क्यों उतारता है ? जान कर हैरान हो जाओगे

लखनऊ: समय पर त्वचा की ऊपरी परत मृत हो जाती है, जिसका स्थान नई त्वचा ले लेती है। इसी के साथ मृत त्वचा शरीर से निकल जाती है। सांपों में भी यही क्रिया होती है, जिसे केंचुल उतरना कहते हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि सांपों की त्वचा स्वाभाविक रूप से शुष्क होती है। साथ ही यह जलरोधी आवरण (waterproof coat) वाली भी होती है। लेकिन समय-समय पर सांपों की त्वचा में तरह-तरह के नुकसान होते रहते हैं, जिससे बाध्य होकर सांप अपनी पुरानी त्वचा को केंचुल की तरह उतार देता है। इससे एक ओर जहां सांप के शरीर की सफाई हो जाती है, वहीं दूसरी ओर उसे त्वचा में पनप रहे संक्रमण से भी मुक्ति मिल जाती है।

आमतौर से सांप केंचुली उतारने से एक सप्ताह पहले से सुस्त हो जाता है। ऐसे में वह और किसी एकांत स्थान पर चला जाता है। इस समय सांप की आंखों पर लिम्फेटिक (lymphatic) नामक द्रव्य जम जाता है, जिससे उसकी आंखें दूधिया हो जाती हैं। इस वजह से वह देखने में अस्मर्थ हो जाता है। इस कारण ऐसी अवस्था में सांप अपना भोजन भी त्याग देते हैं और पूरी तरह से आराम करते हैं। सांप के केंचुली उतारने की प्रक्रिया बहुत कष्टदाई होती है। इसके लिए सबसे पहले सांप अपने मुंह को खुरदुरी सतह पर रगड़ते हैं। सांप की केंचुली का अगला भाग अपेक्षाकृत काफी ढीला होता है, जिससे वह आसानी से निकल जाता है। इसके बाद सांप पेड़ के ठूंठों, पत्थरों, कांटों और खुरदुरी जगहों से अपनी त्वचा को रगडता हुआ चलता है, जिससे उसकी केंचुली इन जगहों पर फंस जाती है और धीरे-धीरे शरीर से उतरती जाती है।

सांपों की केंचुली उतरने के बाद उसकी आंखों पर जमा लिम्फेटिक द्रव्य अवशोष‍ित हो जाता है, जिससे उसकी आंखें फिर से देखने में सक्षम हो जाती हैं। साथ ही केंचुली उतरने के बाद उसकी नई त्वचा बाहर आ जाती है, जो बेहद चमकदार होती है। प्रत्येक सांप की केंचुली पर उसके शल्कों की आकृति की झलक होती है, किन्तु उसमें सांप की त्वचा का रंग नहीं आ पाता है। इसका कारण यह है कि सांप की त्वचा के रंगों का निर्माण करने वाली पिगमेंट कोशिका सांप के साथ ही रह जाती है। लेकिन इसके बावजूद य‍दि सांप की केंचुली सही सलामत हो, तो उसे देखकर उसे छोडने वाले सांप को पहचाना जा सकता है।

अलग-अलग सांपों में केंचुली उतारने का समय अलग-अलग होता है। यह मुख्य रूप से सांप की उम्र, सेहत, प्राकृतिक आवास, तापमान और आद्रता पर मुख्य रूप से निर्भर करता है। वैसे आमतौर से अजगर सांप साल में एक बार तथा धामन सांप साल में 3-4 बार अपनी केंचुली उतारता है।

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