सावधान! पटाखे सिर्फ प्रदूषण ही नहीं फैलाते बल्कि बनते हैं कैंसर की भी वजह

लखनऊ। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ते हुए प्रदूषण के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाया। हालांकि कोर्ट ने ये आदेश कुछ खास तरह के पटाखों पर प्रतिबंधों के साथ दिया है। आदेश में कहा गया है कि विकास के लिए शुद्ध हवा में सांस लेना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पूरी दुनिया में स्वास्थ्य के मामले में सबसे ज़्यादा प्रदूषण वाला शहर रहा है। हालांकि केंद्र ने पूरे देश में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने का विरोध किया है।

सरकार का कहना था कि कुछ हाई-डेसीबेल वाले पटाखों पर ही रोक होनी चाहिए। लेकिन वास्तव में वो कौन सी चीज़ है जो प्रदूषण पैदा करती है और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है। दरअसल पटाखे बनाने के लिए खास तौर पर चार खास तत्वों का प्रयोग किया जाता है। ऑक्सीडाइज़र, फ्यूल, रंग छोड़ने वाले तत्व और बाइंडर यानी जिससे इन सभी तत्वों को एक साथ बांधा जाता है। ऑक्सीडाइज़र नाइट्रेट या क्लोरेट जैसे ऑक्सीजन की अधिकता वाला तत्व होता है जो कि फ्यूल (भारत में खासकर चारकोल) के साथ मिलकर विस्फोट करता है।

विस्फोट के समय जो रंग दिखता है उसके लिए लीथियम या बेरियम नाइट्रेट जैसे तत्वों का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा पटाखे कितनी ज़ोर से फूटेंगे यानी स्पीड और रिएक्शन के लिए एल्युमिनियम, तांबा और टाइटेनियम जैसे तत्वों का प्रयोग किया जाता है।

रंग छोड़ने वाले तत्वों खासकर तांबा और एंटमनी सल्फाइड की वजह से कैंसर होने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। दुनिया भर में किए गए कई सर्वे बताते हैं कि पटाखों को जलाने की वजह से वायु की गुणवत्ता खराब होती है और स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। बच्चों पर और भी ज़्यादा खराब प्रभाव पड़ता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधी क्षमताएं उतनी मज़बूत नहीं होती हैं। इंडियन चेस्ट सोसायटी के अनुसार वायु प्रदूषण की वजह से सांसों की बीमारी और फेफड़े के कैंसर की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

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