सीएम योगी की कुर्सी को खतरा नहीं ,लोकसभा चुनाव तक मिला अभयदान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सीएम योगी अब निरंकुश होकर सरकार चलाते रहेंगे। अब उन्हें किसी का डर नहीं और ना ही अब कोई राजनीतिक हमला उन पर होने वाला है। खबर के मुताविक पिछले दिनों दिल्ली में जब योगी की मुलाक़ात पीएम मोदी से हुयी तो दोनों के बीच बहुत साड़ी बाते हुयी। योगी ने कई नेताओं की शिकायत भी पीएम से की। नयी राजनीति पर चर्चा भी हुयी और अगले लोक सभा चुनाव को लेकर नयी रणनीति भी योगी ने मोदी के सामने रखी। पीएम मोदी काफी खुश हुए और योगी जी को अभयदान दे दिया कि आप ठीक से काम करते रहिये कोई बखेरा नहीं होगा। सरकार अपने हिसाब से चलाइये और किसी की बातों पर ध्यान मत दीजिये। योगी जी खुश हुए और लखनऊ पहुँच गए।

बता दें कि पिछले एक माह से योगी के खिलाफ खूब मुहीम चलाई गयी। कहते हैं कि इस नोखिम को हवा देने वाले कोई और नहीं थे ,उन्ही की पार्टी के नेता थे और मंत्री भी। लेकिन पीएम मोदी से जैसे ही अभयदान मिला सारी मुहिम थम सी गयी। अब उनके सरकार से विदा होने की खबरे नहीं आ रही है। सूत्रों के मुताविक राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कुछ दिन तक अस्पताल में भरती थे पर अब वे इलाज के बाद स्वस्थ्य हो गए हैं। वे जब तक अस्पताल में थे, तब तक योगी के खिलाफ खूब मुहिम चली।

संयोग भी ऐसा था कि उसी समय पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा के नतीजे आए थे। दोनों जगह भाजपा हारी थी। इससे पहले गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर भी भाजपा हार चुकी थी। इस चुनावी हार के अलावा प्रशासनिक कामकाज को लेकर भी योगी सरकार निशाने पर थी। राज्य के मंत्रियों, विधायकों और सांसदों ने दलित उत्पीड़न से लेकर भ्रष्टाचार तक के आरोप लगाए थे। तब ऐसा लग रहा था कि मुख्यमंत्री के पद पर योगी आदित्यनाथ के दिन गिने चुने हैं।

अब चर्चा है कि योगी को अगले लोकसभा चुनाव तक अभयदान मिल गई है। उनकी कुर्सी को कोई खतरा नहीं है। पर साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद कुर्सी रहने की कोई गारंटी भी नहीं है। जानकार सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव चूंकि नरेंद्र मोदी के नाम पर होंगे और उनके चेहरे पर लड़े जाएंगे इसलिए लोग योगी सरकार के कामकाज पर ध्यान नहीं देंगे। उलटे उनके होने से ध्रुवीकरण कराना अपेक्षाकृत आसान रहेगा। पर उसके बाद विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को नेतृत्व बदलना होगा क्योंकि पार्टी को राज्य में अन्य पिछड़ी जातियों की राजनीति को आगे बढ़ाना है और ब्राह्मण वोट टूटने से बचाना है। तभी माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले कोई पिछड़ा या ब्राह्मण मुख्यमंत्री बन सकता है।

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