सुख-समृद्धि लाती हैं एक्वेरियम की मछलियां, जानें इसके नियम

लखनऊ: एक्वेरियम रखना जगह की सुंदरता को तो बढ़ाता ही है साथ ही मछलियों को देखना मन को तरोताज़ा भी कर देता है,जब कभी तनाव महसूस होता है तो एक्वेरियम में यहाँ-वहां तैरती रंग-बिरंगी मछलियों को देखने पर झट से गायब हो जाता है।वास्तु-फेंगशुई के अनुसार फिश एक्वेरियम न सिर्फ ख़ुशी देता है बल्कि इससे घर के सदस्यों के ऊपर आने वाली सारी विपत्तियां टल जाती हैं। साथ ही घर में धन आगमन की निरंतरता बनी रहती है।

लेकिन वास्तु-फेंगशुई के नियमों को ध्यान में रखकर ही आप एक्वेरियम का पूरा लाभ उठा सकते हैं।गलत दिशा में रखने से इसका प्रभाव नकारात्मक भी हो सकता है। वहीं सही दिशा में एक्वेरियम रखने से इसमें घूमती मछलियां घर की नेगटिव एनर्जी को दूर करती हैं।अपने घर में एक छोटे से एक्वेरियम में मछलियां पालना सौभाग्यवर्धक माना गया है।फेंग शुई में मछली को सफलता व व्यवसाय में बढ़ोत्तरी का प्रतीक भी माना जाता है।

फिश एक्वेरियम के नियम
– फिश एक्वेरियम को घर की पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना गया है। जल की इन दिशाओं में एक्वेरियम रखने से वहां की पॉज़िटिव एनर्जी बढ़ती है।

– ध्यान रहे कि कभी भी रसोईघर में एक्वेरियम नहीं रखना चाहिए,रसोईघर में अग्नितत्व होता है और एक्वेरियम जल तत्व का प्रतीक है। वास्तु के अनुसार आग और पानी एक जगह रखने से आपसी कलह की संभावना बढ़ती है।

– एक्वेरियम में मछलियों की संख्या कम से कम नौ होनी चाहिए। इनमें से आठ मछली लाल और सुनहरे रंग की और एक काले रंग की मछली जरूर होनी चाहिए। काले रंग की मछली सुरक्षा का प्रतीक है। यह नकारात्मक शक्तियों से घर की रक्षा करती है।

– एक्वेरियम में समय-समय पर मछलियां मरती रहती हैं, मरी हुई मछली को तुरंत हटा देना चाहिए और जिस रंग की मछली मरी हो उसी रंग की नयी मछली लाकर एक्वेरियम में ज़रूर डाल देना चाहिए। फेंग शुई के अनुसार एक्वेरियम में जब कोई मछली मरती है तो वह अपने साथ नकारात्मक शक्तियों को लेकर चली जाती है।

– एक्वेरियम के द्वारा घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए समय-समय पर इसका पानी बदलते रहना चाहिए।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper