‘सुप्रीम’ संकट के हल की कोशिशें तेज

नईं दिल्ली। ’सुप्रीम’ संकट का जल्द ही समाधान निकलने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन और बार काउंसिल ऑफ इंडिया इसको लेकर काफी सक्रिय हो गए हैं। इनके प्रतिनिधिमंडल ने चीफ जस्टिस और अन्य जजों से मुलाकात कर मौजूदा संकट का हल निकालने की पहल की है।

सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन (एससीबीए) के प्रेजिडेंट विकास सिंह ने बताया कि उनकी रविवार देर शाम सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मुलाकात हुईं है और इस दौरान चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन की ओर से दिए प्रस्ताव पर सकारात्मक तौर पर गौर करने का भरोसा दिया है।

सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन ने चीफ जस्टिस से मामले को पुल कोर्ट में हल करने और तमाम पीआईंएल पांचों सीनियर जज के सामने लगाने का आग्रह किया है। विकास सिह ने बताया कि सीजेआईं के साथ मीटिग 15 मिनट के करीब चली और काफी सकारात्मक रही है। सिह ने कहा कि उन्होंने सीजेआईं को एससीबीए के प्रस्ताव की कॉपी सौंपी और उन्होंने भरोसा दिया कि वह इसे देखेंगे। सिह ने कहा, ’मैं सीजेआईं से मिला और उन्हें प्रस्ताव की प्रति सौंपी।’

उन्होंने उम्मीद जताईं कि सुप्रीम कोर्ट के सभी जज एससीबीए के प्रस्ताव पर विचार करेंगे। बता दें कि शुव्रवार को सुप्रीम कोर्ट के 4 सबसे वरिष्ठ जजों के प्रेस कॉन्प्रेंस कर सीजेआईं के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद एससीबीए ने शनिवार को आपात बैठक की।एससीबीए ने शनिवार को हुईं अपनी आपात बैठक में ताजा संकट के हल के लिए सर्वसम्मति से 2 प्रस्ताव पास किए थे। असोसिएशन ने मांग की है कि जजों के बीच मतभेदों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के सभी जज मिलकर विचार करें और फैसला दें।

असोसिएशन ने कहा कि संस्था की विश्वसनीयता बहाल होनी चाहिए। एससीबीए का पहला प्रस्ताव यह है कि जजों के मतभेदों से जुड़े मसलों पर पुल कोर्ट विचार करे। दूसरा प्रस्ताव है कि जनहित याचिकाओं की सुनवाईं या तो सीजेआईं की बेंच या फिर कलीजियम में शामिल जजों की बेंच में ही हो ताकि संस्था की विश्वसनीयता बरकरार रहे। दरअसल पुल कोर्ट की सुनवाईं में कोर्ट के सभी जज हिस्सा लेते हैं और यह इन-हाउस होती है, ओपन नहीं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में सीजेआईं समेत वुल 25 जज हैं। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआईं समेत 31 जजों के पद हैं।

उधर, बार काउंसिल ऑफ इंडिया का एक प्रतिनिधिमंडल भी चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मिला है। बीसीआईं अध्यक्ष मनन वुमार मिश्रा ने बताया कि बार कांउसिल की भूमिका बहुत सीमित है और न्यायाधीशों ने इसे भरोसा दिलाया है कि कोईं समस्या नहीं होगी। बीसीआईं अध्यक्ष ने कहा, ’प्रतिनिधिमंडल ने न्यायमरूति जे. चेलामेश्वर, न्यायमरूति एम. बी. लोवुर, न्यायमरूति वुरियन जोसेफ से मुलाकात की और उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर चीज को सुलझा लिया जाएगा।’

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