सुस्त अर्थव्यवस्था : जीडीपी विकास दर में गिरावट, 4.5 प्रतिशत पर पहुंची

नई दिल्ली: आर्थिक सुस्ती के कारण विनिर्माण, कृषि और खान एवं खनन क्षेत्र के निराशाजनक प्रदर्शन से चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 26 तिमाहियों के निचले स्तर 4.5 प्रतिशत पर आ गई जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह सात प्रतिशत रही थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर पांच प्रतिशत रही थी। यह लगातार छठी तिमाही है जब जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई है। इस साल 30 सितंबर को समाप्त तिमाही में सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) वृद्धि दर 4.3 प्रतिशत रही जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 6.9 प्रतिशत रही थी। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2012-13 की अंतिम तिमाही (4.3 प्रतिशत) के बाद का निचला स्तर है। इस तरह से 26 तिमाहियों के निचले स्तर पर लुढ़क गयी है।

केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा यहाँ जारी आँकड़ों के अनुसार, इस तिमाही में विनिर्माण गतिविधियों में एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 5.6 प्रतिशत बढ़ी थी। विनिर्माण गतिविधियों में आयी भारी गिरावट ने देश की आर्थिक गतिविधियों पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव डाला है। हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गत दिनों संसद में दिये अपने बयान में इसे “सुस्ती” करार देते हुये “मंदी” मानने से पूरी तरह इनकार कर दिया था और कहा था कि देश के अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है तथा अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतक आगे आर्थिक गतिविधियो में तेजी के संकेत दे रहे हैं।

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 2.1 प्रतिशत रही है जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 4.9 प्रतिशत रही थी। इस अवधि मे खान एवं खनन गतिविधियों में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढोतरी हुयी है जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2.2 प्रतिशत ऋणात्मक रहा था। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 4.3 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल करने वाले क्षेत्रों में ट्रेड, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण से जुड़ी सेवायें, वित्त, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवायें तथा लोक प्रशासल, रक्षा और अन्य सेवायें शामिल हैं। इसी तरह से बिजली, गैस जलापूर्ति और अन्य यूटिलिटी सेवाओं की वृद्धि दर 3.6 प्रतिशत रही जबकि निर्माण गतिविधियों में 3.3 प्रतिशत की तेजी रही।

चालू वित्त वर्ष के पहले सात माह अप्रैल-अक्टूबर के दौरान सरकार का वित्तीय घाटा वर्ष 2019-20 के बजट अनुमान की तुलना में 102.40 प्रतिशत पर पहुँच गया है। शुक्रवार को जारी सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर के दौरान सात माह में वित्तीय घाटा 7.2 लाख करोड़ रुपये रहा। चालू वित्त वर्ष के लिए कुल वित्तीय घाटे का बजट अनुमान 7.03 लाख करोड़ रुपये लगाया गया था। जीडीपी आंकड़े जारी होने के बाद सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के.वी. सुब्रमण्यमय ने संवाददाताओं से चर्चा में तीसरी तिमाही से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना जताते हुए कहा है कि वह अभी भी दोहरा रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। इस दौरान मौजूद आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती ने कहा कि इस वर्ष इक्विटी पूँजी प्रवाह सकारात्मक है।

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