सोनभद्र में सोलर पॉवर पैक लगाने में लाखों रुपये का हुआ खेल, लोगों से भी की गई वसूली

सोनभद्र। सौभाग्य यानी सहज बिजली हर घर बिजली योजना के जरिए लोगों के घर में रोशनी फैलाने के लिए करोड़ों रुपये का बजट आया लेकिन, उसमें लाखों रुपये का खेल करके पात्रों को लाभ न देकर अपात्रों को दे दिया गया। सबसे बड़ा खेल तो आदिवासी बाहुल्य इलाके में सोलर पॉवर पैक लगाने के नाम पर हुआ है। यहां जिनके घर पहले से विद्युत का कनेक्शन था उनके घर ही सोलर पॉवर पैक लगा दिया गया। इसके बदले में उनसे पांच से दस हजार रुपये की वसूली भी की गई। ताजा मामला करीब दुद्धी तहसील क्षेत्र के बभनी का है। यहां शिकायत के आधार पर हुई जांच में गड़बड़ी मिलने व वसूली किए जाने के मामले की पुष्टि भी हुई है। हालांकि नेडा ने महज दो लोगों पर एफआइआर कराकर अपने काम से इतिश्री कर लिया है।

बभनी के चैनपुर गांव निवासी रामानंद के घर में पत्नी के नाम से विद्युत का कनेक्शन है। बावजूद इसके इनके घर सोलर पॉवर पैक लगा दिया गया। इसके बदले में चार हजार रुपये की वसूली की गई। इसी तरह मुनगाडीह के बालेश्वर के बगल में विद्युत का तार है, यानी वे जब चाहे कनेक्शन ले सकते हैं। बावजूद इसके इनके घर सोलर पॉवर पैक लगाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। ऐसा केवल इन्हीं दो लोगों के घर नहीं हुआ बल्कि 200 से 250 के बीच ऐसे लोग हैं जिन्होंने चार हजार से लेकर 10 हजार रुपये का सुविधा शुल्क देकर अपने घर पर गलत ढंग से सोलर पॉवर पैक लगावा लिया है।

इसकी शिकायत हुई तो बभनी के खंड विकास अधिकारी ने जांच की। जांच में भी आरोपों की पुष्टि हो गई तो नेडा ने भी अपने स्तर से जांच करवाया। जांच में पता चला कि मिलीभगत व अनियमितता करके सैकड़ों स्थानों पर गलत तरीके से पॉवर पैक लगाया गया है। ऐसे में पीओ नेडा ने बभनी थाने में वेंडर संजीव कुमार व करुणेंद्र के खिलाफ एफआइआर कराया गया। वहीं ग्रामीणों ने जिसके द्वारा वसूली करने की बात कही गई उसके खिलाफ कोई मुकदमा तक दर्ज नहीं किया गया।

सरकार की योजना के अनुसार ऐसे घरों के पास या घरों में सोलर पॉवर पैक लगाना था जिनके घर किसी भी तरह से विद्युत का कनेक्शन न हो। पहाड़ी, जंगल या ऐसा इलाका जहां विद्युतीकरण की संभावना न हो। सूत्रों की मानें तो शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना में विभागीय मिलीभगत, स्थानीय स्तर के कुछ जनप्रतिनिधियों के अनावश्यक दबाव, लगाने वालों की मनमानी की वजह से योजना को बट्टा लग रहा है। अगर मामले की ठीक से जांच जो जाए तो विभागीय लोगों की भी गर्दन फंसनी तय है।

जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए उस हिसाब से योजना के क्रियान्वयन में कई स्तर से गड़बड़ी हुई है। मुख्यालय स्तर से दो कंपनियों को इसका टेंडर दिया गया। कंपनियों ने निचले स्तर पर दो वेंडरों को नियुक्त कर दिया। एक सोलर पॉवर पैक लगाने के लिए 47129 रुपये की लागत निर्धारित की गई। जब योजना गांवों में पहुंची तो इसमें लगाने वालों को सुविधा शुल्क देकर अनियमितता की जाने लगी। किसी ने पांच हजार तो किसी ने दस हजार रुपये दिया और अपने घर के पास लाइट लगवा दिया। इससे एक पंखा व पांच बल्ब जलाने की व्यवस्था है।

परियोजना अधिकारी नेडा प्रेमशंकर सिंह ने बताया कि बभनी में सोलर पॉवर पैक लगाने के नाम पर हुई अनियमितता के मामले में एफआइआर कराई जा चुकी है। उसकी और भी जांच हो रही है। अभी तक पता करने पर जानकारी हुई है कि 200 से 250 स्थानों पर इस तरह की गड़बड़ी की गई है।

जागरण से साभार

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