सौरव गांगुली बनेंगे BCCI अध्यक्ष

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) में नए अध्यक्ष बनेंगे। वहीं, गुजरात क्रिकेट संघ के पूर्व संयुक्त सचिव व गृहमंत्री अमित शाह के पुत्र जय शाह बोर्ड के नए सचिव होंगे। शाह सहित संयुक्त सचिव, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष पद के उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा सोमवार को होगी। इसके अलावा अरुण ठाकुर का कोषाध्यक्ष, जयेश जॉर्ज का संयुक्त सचिव, उत्तराखंड/उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि माहिम वर्मा का उपाध्यक्ष बनना तय है।

पूर्व बीसीसीआइ और आइसीसी चेयरमैन के करीबी व कर्नाटक क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि बृजेश पटेल आइपीएल के नए चेयरमैन बनेंगे। मुंबई में रविवार शाम को हुई राज्य क्रिकेट संघ के प्रतिनिधियों की बैठक में यह घोषणा की गई। दैनिक जागरण ने शनिवार को ही बता दिया था कि जय शाह बीसीसीआइ में मुख्य भूमिका में होंगे। इसके अलावा गांगुली और पटेल को भी बड़ा पद मिलेगा। शनिवार को भाजपा के एक बड़े नेता के घर में बैठक हुई थी। उसके बाद रविवार को मुंबई में बैठक हुई। इसके साथ ही यह भी तय हो गया है कि इस बार बीसीसीआइ में कोई चुनाव नहीं होगा और सभी पदों पर निर्विरोध चयन होगा।

मुंबई में बीसीसीआइ मुख्यालय में राज्य संघों से जुड़े सभी दिग्गज पदाधिकारियों की बैठक हुई। इस बैठक में बीसीसीआइ में अहम पदों के लिए उपयुक्त पदाधिकारियों के नामों की चर्चा की गई। हालांकि पदों पर फैसला शाम तक ही होना था लेकिन बैठक रात 11 बजे तक चली। बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और पूर्व बीसीसीआइ अध्यक्ष अनुराग ठाकुर, पूर्व आइपीएल चेयरमैन राजीव शुक्ला, पूर्व आइसीसी चेयरमैन एन श्रीनिवासन मौजूद रहे। श्रीनिवासन गुट ब्रजेश पटेल को बीसीसीआइ अध्यक्ष और गांगुली को आइपीएल चेयरमैन बनाना चाहता था लेकिन गांगुली आइपीएल चेयरमैन बनने को तैयार नहीं थे।

गांगुली इस बात पर अड़ गए कि वह चेयरमैन पद के लिए 22 कंपनियों के साथ चल रहे व्यापारिक करार नहीं छोड़ेंगे। वह इन सभी करार को तभी छोड़ेंगे अगर उन्हें बीसीसीआइ अध्यक्ष पद दिया जाए। यही कारण रहा कि शाम को पांच बजे शुरू हुई यह बैठक देर रात तक चलती रही। आखिरकार सभी ने गांगुली की बात मान ली। इसके अलावा अनुराग ठाकुर के भाई अरुण सिंह धूमल का भी कोषाध्यक्ष बनना लगभग तय है। हालांकि अध्यक्ष और आइपीएल चेयरमैन पद के अलावा सभी पदों के लिए नामों की सोमवार को होने वाले नामांकन से पहले अधिकारिक घोषणा की जाएगी।

लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखा जाए तो गांगुली और शाह आठ से 10 महीने तक ही पदों पर बैठ पाएंगे, क्योंकि इसके बाद दोनों का कूलिंग ऑफ पीरियड शुरू हो जाएगा। ये दोनों पहले ही पांच साल से ज्यादा अपने अपने राज्य क्रिकेट संघों के पदाधिकारी रहे हैं। अगर इन 10 महीनों में ऐसा कुछ बड़ा बदलाव नहीं होता है तो इन लोगों को हटना पड़ेगा। अगर इस दौरान केंद्र सरकार खेल बिल लाती है और बीसीसीआइ को उसमें शामिल करती है तो फिर स्थितियां बदल सकती हैं।

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