हमेशा जवां व सुन्दर बने रहने का राज छिपा है इस एक बीज में

दोस्तों आज हम अलसी के बारे में बताएंगे अगर आपको अपना लंबा जीवन बिना बीमारियों के जीना है। तो फिर आज हम आपको अलसी खाने का सही तरीका बतायेंगे। हजारों सालों से अलसी का प्रयोग हमारे दैनिक जीवन में होता आ रहा है। आयुर्वेद में इसे वरदान माना गया है। लेकिन बहुत सारे लोग इसका इस्तेमाल करने का सही तरीका नहीं जानते हैं। चलिए आज मैं आपको अलसी को प्रयोग करने का एकदम सही व बेस्ट तरीका बताती हूं।

अलसी के बीज और इस के तेल में ओमेगा 3 फैटी एसिड होते हैं। जिनमें चिकित्सा के बहुत ही जबरदस्त गुण पाए जाते हैं। अलसी के बीज का इस्तेमाल खानपान में मेसोपोटामिया सभ्यता काल से होता आ रहा है। भारत में भी ये आयुर्वेदिक उपचारों भोज्य पदार्थ बनाने में प्रयुक्त होता रहा है। विज्ञान की नई खोज से पता चलता है कि अलसी कई प्रकार के लोगों और सामान्य स्वास्थ के लिए बहुत ही ज्यादा गुणकारी है। दुनिया के अनेक देशों में अलसी या फ्लैक्सीड लोकप्रिय स्वास्थ्यप्रद आहार के रूप में जाना जाता है।

आयुर्वेद में अलसी को मंदगंध युक्त मधुर, बल कारक, किंचित, अपवाद, कफ वात, कारक पित्त नाशक, पचने में भारी गरम पौष्टिक कामोद्दीपक पीठ के दर्द और सूजन को मिटाने वाली कहा जाता है। इसके बीजों को गर्म पानी में उबालकर या इसके साथ एक तिहाई भाग मुलेठी का चूर्ण मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से खूनी दस्त और मूत्र संबंधी सभी रोगों में लाभ मिलता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। यह सबसे अधिक मात्रा में समुद्री मछलियों से प्राप्त होता है। लेकिन शाकाहारी लोग पर्याप्त मात्रा में अलसी का सेवन करके इसके लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

अलसी के बीज में आयरन, पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, विटामिन सी, विटामिन इ कैरोटीन तत्व पाए जाते हैं। अलसी के बीजों का सेवन त्वचा को स्वास्थ व सुंदर बनाता है। नाखूनों को मजबूत और चिकना करता है। नेत्र दृष्टि बरकरार रखता है बालों को टूटने से रोकता है। और डेंड्रफ भी खत्म कर देता है यह त्वचा की सभी बीमारियों एक्जिमा सोरायसिस के उपचार में भी बहुत ज्यादा कारगर माना गया है। अलसी के बीज एस्ट्रोजन और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है। इसी वजह से यह औरतों के हारमोनल बैलेंस के लिए बहुत सहायक होता है।

इन्हें आप चाहे ऐसे ही खाएं या हल्का भूनकर खाएं अथवा सलाद या फिर दही में मिलाकर खाएं चाहे तो जूस में मिलाकर भी पी सकते हैं। यह जूस के स्वाद को बिना बदले उसकी पौष्टिकता कई गुना ज्यादा बढ़ा देता है। अलसी के बीज ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने हाइपरटेंशन के रोगियों के लिए ब्लड शुगर कंट्रोल में करने के लिए अत्यंत लाभदायक होती है। यह बीज विटामिन बी, कांप्लेक्स, मैग्नीशियम, मैगनीज तत्वों से भरपूर होते हैं। जोकि कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं।

अलसी में कुछ ऐसे भी गुण होते हैं जो ब्रेस्ट प्रोस्टेट और कोलन कैंसर से बचाव करते हैं। इन बीजों में पाया जाने वाला जो तत्व होता है। वह जोड़ों की बीमारी अर्थराइटिस के लिए और सभी तरह के जॉइंट पैन में बहुत ज्यादा राहत दिलाता है। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को इसका सेवन अवश्य करना चाहिए। आज भी शहरों और कस्बों में बहुत से परिवारों में ऐसी स्त्री को अलसी के बने लड्डू और अन्य भोज्य पदार्थ दिए जाते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे पूर्वज अलसी का महत्व बहुत अच्छी तरह से जानते थे। और समझते थे पर हम इन्हें बुलाकर के सिर्फ दवाइयां खाने में ही विश्वास करने लगे हैं।

दोस्तों अलसी के बीज ओमेगा 3 फैटी एसिड का बहुत अच्छा स्रोत माना जाने जाते हैं। ओमेगा 3 फैटी एसिड की कैप्सूल यह अच्छा विकल्प भी है। डाइटीशियन और डॉक्टर भी आजकल इसे खाने की सलाह देते हैं।यह बीज फाइबर से भरपूर होते हैं और वजन घटाने में भी बहुत कारगर है। महिलाओं में महावारी के दौरान होने वाली समस्याओं में भी अलसी के उपयोग से राहत मिलती है। यह देखा गया है कि महिला माइल्ड मेनोपॉज की समस्या में रोजाना करीब 40 ग्राम पिसी हुई अलसी खाने से वही लाभ मिलता है जो हार्मोन थेरेपी से मिलते हैं। अलसी किडनी संबंधित समस्याओं में भी काफी लाभकारी होती है। डायबिटीज कैंसर ल्यूपस और आर्थराइटिस आदि रोगों में भी इसके प्रभावों पर रिसर्च की जा रही है।

अलसी के बीज एंटीबैक्टीरियल एंटी फंगल और एंटी वायरल होते हैं। इनका उपयोग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

अलसी के साबुत बीज कई बार हमारी बॉडी में पचे बिना ही निकल जाते हैं। इसीलिए हमेशा इन्हें पीसकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। 20 ग्राम (एक टेबलस्पून) अलसी पाउडर को सुबह खाली पेट हल्के गर्म पानी के साथ लेने से शुरुआत करें। आप इसे फल या फिर सब्जी के ताजा जूस में मिला सकते हैं। या अपने भोजन के ऊपर छिड़क कर भी खा सकते हैं। दिन में (दो टेबलस्पून) यानी 40 ग्राम से ज्यादा अलसी का सेवन आपको नहीं करना चाहिए। साबुत अलसी लंबे टाइम तक खराब नहीं होती है। लेकिन इसका पाउडर हवा में मौजूद ऑक्सीजन के प्रभाव में खराब हो जाता है। इसीलिए आपको जितनी जरूरत हो उसके मुताबिक ही अलसी को ताजा पीसकर ही इस्तेमाल करें। इससे ज्यादा मात्रा में पीसकर ना रखें बहुत ज्यादा सुखाने या फिर फ्राई करने से इस के औषधीय गुण नष्ट हो जाते हैं। और इसका स्वाद भी बिगड़ सकता।

अलसी खाने से बहुत से लोगों को शुरुआत में कब्ज वगैरह हो सकती है। ऐसा होने पर पानी ज्यादा ना पिए। अलसी खून को पतला करती है इसीलिए अगर आपको ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो इसके सेवन से पहले डॉक्टर से मशवरा जरूर कर लें। अलसी के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ पर पड़ने वाले प्रभाव पर हालांकि कोई भी बड़ी रिसर्च नहीं हुई है। लेकिन पारंपरिक ज्ञान में अलसी को बहुत ही ज्यादा गुणकारी माना गया है। इसके उपयोग से कोलेस्ट्रॉल के लेवल में कमी आना देखा गया है।

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लखनऊ ट्रिब्यून

Vineet Kumar Verma

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