हेल्थ सिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्चे के कटे हाथ को जोड़कर दी नई जिंदगी

लखनऊ: राजधानी के हेल्थ सिटी अस्पताल के डाॅक्टरों ने मरीज के कटे हाथ को जोड़कर उसे नई जिंदगी दी है। बच्चे का हाथ कलाई से कट गया था। अब वह खतरे से बाहर बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि 9 जुलाई की दोपहर में सीतापुर जिले के र्कुदौली ग्राम क्षेत्र में एक 12 वर्षीय बालक सौरभ शुक्ला के दाहिने हाथ का सम्पूर्ण निचला हिस्सा उस वक्त कट कर अलग हो गया जब वह लखनऊ से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित गांव में अपने ननिहाल के प्रांगण में चलती हुई चारा कटिंग आरा मशीन के सम्पर्क में आ गया।

सौरभ के पिता जो कि एक गरीब निजी वाहन चालक हैं व घटना के समय लखनऊ में थे उनके वाहन स्वामी अनुराग श्रीवास्तव ने मानवीयता का अतुलनीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्हे अपना निजी वाहन सौंपते हुए अविलम्ब लहुलुहान हुए बालक व उसके कटे हुए हाथ को अत्यन्त सावधानीपूर्वक लखनऊ के गोमती नगर स्थित हेल्थ सिटी अस्पताल के निदेशक व प्रख्यात प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर वैभव खन्ना के समक्ष ले आने का परामर्श दिया।

बालक के व्यथित व व्याकुल पिता बिना कोई देरी किए हुए सीतापुर कूच कर घटना स्थल पर पहॅुचे और फौरन अपने लहुलुहान पुत्र व उसके कटे हुए हाथ को सावधानीपूर्वक बर्फ में सहेज कर र्दुघटना के समय से चार घण्टे के भीतर ही वापस आकर डॉ. खन्ना के समक्ष हेल्थ सिटी अस्पताल में प्रस्तुत हुए।

गौरतलब है कि बालक के पिता ने अत्यन्त साहस व बुद्विमता का परिचय देते हुए कटे हुए हाथ को बड़े सावधानी से गील कपड़े में लपेट कर उसे पाॅलीथीन की पन्नी में पैक करके बाहर से बर्फ में ढककर (ध्यान रहे बर्फ के सीधे सम्पर्क में कटा हुए अंग की रक्त कोशिकाएं जम जाती है और फिर प्रत्यारोपण सम्भव नहीं हो पाता है) यथावस्था मे अस्पताल लेकर पहॅुचे जो कि समय रहते सफल उपचार की सबसे बड़ी वजह व मिसाल है।

उमस भरे गर्मी के इस वातावरण में जब बालक को अस्पताल लाया गया उस वक्त उसके कटे हुए हाथ की स्थिति काफी अच्छी थी, कोशिकाएं मुलायम थीं और चिकित्सा विशेषज्ञ कुछ कर सकने की स्थित में थे। और तो और आश्चर्य का विषय है कि बालक पूरे होशोहवास में था और रो भी नहीं रहा था। उसका आत्मविश्वास हतप्रभ करने वाला था। वह कह रहा था कि उसे भरोसा है कि उसका हाथ फिर से जुड़ जाएगा। अविश्वस्नीय!

आपातकालीन स्थिति को देखते हुए कोरोना जाॅच की परवाह किए बिना डा. वैभव खन्ना व सुप्रसिद्व हड्डी रोग विशेषज्ञ डा0 संदीप गर्ग की टीम ने सभी
प्राथमिक व आवश्यक चिकित्सा मानकों का पालन करते हुए सर्जरी प्रारम्भ कर दी गई। आजकल ऑपरेशन बिना कोरोना जाॅच के नहीं हो रहे हैं। ऐसे में आपातकालीन स्थिति को देखते हुए कोरोना की जांच की परवाह किये बिना डॉ० सुबोध कुमार ने उसे एनस्थेसिआ दिया उसका ऑपरेशन किया गया, डॉ० गर्ग की टीम ने किया बोन को फिक्स किया और जो पैरामेडिक्स थे उन्होंने एक बार भी उफ्फ नहीं करी कि इसका कोरोना जाँच नहीं हुआ है। जो भी बेसिक प्रिकॉशंस थे वो लिए गये और इस ऑपरेशन को अंजाम दिया और बालक निरन्तर पूरी टीम के मुआयने में रहा।

तकरीबन 7 घण्टे के अथक प्रयास के पश्चात् आखिरकार बालके के कटे हुए हाथ का सफल प्रत्यारोपण कर उसे पुनः नवजीवन प्रदान किया गया।
गौरतलब है कि ऐसी परिथितियों में हर एक पल मायने रख़ता है और बिना कोई वक्त बरबाद किए ऐसे मरीजों को तत्काल किसी विशिष्ट चिकित्सा केन्द्र पर ले जाना चाहिए व उपयुक्त तौर पर ऑपरेशन घटना के 4 से 6 घण्टे के अन्दर ही प्रारम्भ हो जाना चाहिए।

बालक के सफल ऑपरेशन में डॉक्टर वैभव खन्ना व डॉ. संदीप गर्ग के संयुक्त निर्देशन में टीम के अन्य विषेशज्ञ क्रमशः डॉ. आर्दश कुमार, डॉ. रोमश कोहली, डॉ. एस.पी.एस. तुलसी, डॉ. प्रमेश अग्रवाल, डॉ. सुबोध कुमार व डॉ. पुलकित सिंह का योगदान अतिप्रशंसनीय है।

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