2022 के लिए प्रशासन के हर कोने को दुरुस्त करने में जुटे योगी

लखनऊ: लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश में 62 सीटें मिलने के बाद उत्साहित राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब 2022 के राज्य विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। इसके लिए उन्होंने प्रशासन के हर कोने को चुस्त-दुरुस्त करने का काम तेजी से शुरू कर दिया है। योगी ने इस क्रम में विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों और जिला स्तर के अधिकारियों के साथ तीन दिनों तक अलग-अलग समीक्षा बैठकें की हैं। अधिकारियों के लिए उन्होंने लक्ष्य भी तय कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, योगी के निर्देश पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों को पहले ही पत्र भेजकर समीक्षा बैठक की तैयारी के लिए कह दिया था। योगी और उनकी पार्टी भाजपा को लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद यह समझ में आ गया है कि यदि प्रशासन को निचले स्तर तक ठीक कर लिया जाए और उसे जनता के प्रति जवाबदेह बना लिया जाए तो 2022 की राह आसान हो जाएगी। योगी को यह भी पता है कि लोकसभा चुनाव में मोदी का चेहरा सामने था, लेकिन विधानसभा चुनाव में जनता उनकी और उनके कामों की समीक्षा करेगी।

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योगी ने इसीलिए अपने कामों की समीक्षा शुरू कर दी। उन्होंने इसके लिए तीन दिन समीक्षा बैठकों के लिए निर्धारित किया। 12 जून को हुई पहली बैठक में उन्होंने कानून-व्यवस्था, विकास कायरें, और राजस्व विभाग के निचले स्तर तक की जानकारी प्राप्त की। उसके बाद 13 जून को मुख्यमंत्री ने चिकित्सा विभाग की समीक्षा की, जिसमें उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारियों से लेकर डॉक्टरों तक की जवाबदेही तय की है। अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे खुद जमीन पर उतर कर कार्य करें। मुख्यमंत्री ने 14 जून को माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा की रूपरेखा और उसे सुदृढ़ बनाने पर चर्चा की और लक्ष्य निर्धारित किए।

योगी ने सभी बड़े अधिकारियों को 15 से 20 जून तक जिले का भ्रमण कर विकास योजनाओं की हकीकत जानने को कहा है। इसके लिए 45 अधिकारियों की एक टीम भी गठित की गई है, जो हर जिले में जाकर विकास कार्यो का निरीक्षण करेंगे। सभी अधिकारी अपनी रिपोर्ट 20 जून तक मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपेगे। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी खुद 21 जून से मंडलीय निरीक्षण के लिए निकलेंगे। मुख्यमंत्री हर उस मूल मुद्दे को छूना चाहते हैं, जो जनता से सीधे जुड़ा हो।

उत्तर प्रदेश की राजनीति के जानकार राजीव श्रीवास्तव कहते हैं, “2019 का चुनाव मोदी और उनकी योजनाओं के नाम पर लड़ा गया है। लेकिन 2022 का चुनाव में सीधे योगी की परीक्षा होगी। अभी तक जो दो साल बीते हैं, उसमें लोगों का कहना है कि योगी की मंशा तो ठीक है, लेकिन उनके अधिकारी काम नहीं करना चाहते हैं। काम जमीन तक नहीं पहुंचा है। इसीलिए योगी खुद जमीनी हकीकत से रूबरू हो रहे हैं। डीएम और एसपी से मुख्यमंत्री तो बैठक करते रहे हैं, लेकिन योगी ने मुख्य चिकित्साधिकारियों और जिला चिकित्सा अधीक्षकों के साथ बैठक की है।”

श्रीवास्तव ने कहा, “योगी जमीनी स्तर के अधिकारियों के साथ क्षेत्र में जाकर संवाद करते दिखाई देने वाले हैं। यह एक बड़े बदलाव का प्रयास है। वह बीच से मध्यस्थों को खत्म कर अधिकारियों से सीधे फीड बैक लेने के प्रयास में है।” भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता डा़ॅ चन्द्र मोहन ने मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों पर कहा, “उप्र की जनता ने जो जनादेश दिया है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे जवाबदेही के रूप में स्वीकार किया है। वह इसीलिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों से खुद फीडबैक ले रहे हैं और मोदी की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।”

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