देश की 24 सरकारी कंपनियां बेच रही है मोदी सरकार

अखिलेश अखिल


नई दिल्ली: खबर यही है कि अगर सब कुछ सोची समझी नियम और नीति के अनुसार चलता रहा तो देश के करीब 24 सरकारी उपक्रम को मोदी सरकार विनिवेश करने या बेचने जा रही है। इसकी पूरी तैयारी कर ली गयी है। राज्य सभा सदस्य डी राजा द्वारा वित्त मंत्री से पूछे गए सवाल के बाद सरकार की तरफ से 2 जनवरी को जो जबाब मिले हैं वे चौकाने वाले हैं। जबाब में कहा गया है कि सरकार 24 सरकारी कंपनियों को विनिवेश करने की योजना पर काम कर रही है।

आपको बता दें कि सरकार की तरफ से जिन कंपनियों की सूचि जारी की गयी है उनमे एयर इंडिया ,हिंदुस्तान पेट्रोलियम , स्कूटर्स इंडिया ,पवन हंस ,अर्थ मुभर्श,सीमेंट कॉर्पोरेशन जैसी कंपनियां शामिल है। आजादी के बाद स्थापित ये सरकारी कंपनियां देश के विकास में काफी मददगार रही है लेकिन समय के साथ भ्रष्टाचार की वजह से ये कंपनियां लूट का अखाड़ा बन गयी और देश और जनता पर बोझ बन गयी। ऊपरी तौर पर देखने से साफ़ लगता है कि ये कंपनियां वास्तव में बिक जानी चाहिए और अब इनकी कोई जरूरत नहीं रह गयी है। वैसे भी उदारीकरण के बाद देशी सरकारी कंपनियों को हम लगातार बेचते ही रहे हैं। इसी सूचि में अब 24 अन्य कंपनियां भी शामिल हो जायेगी।

लेकिन यह तस्वीर का एक पक्ष है। दुसरा पक्ष यह भी है कि जब मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को गतिमान करने के लिए मेक इन इंडिया ,स्टार्टअप इंडिया ,स्किल इंडिया और ना जाने क्या योजनाए जब चला रही है तो क्यों ना इन कंपनियों को बेहतर तरीके से चलाई जाए। यह एक सवाल खड़ा है। उदारीकरण के इतिहास को देखें तो सबसे पहले कांग्रेस की सरकार ने ही घाटे में चल रहे कंपनियों को बेचने का काम शुरू किया था।

 

तब विपक्ष में बीजेपी हल्ला मचती रहती थी। नरसिम्हा राव की सरकार जाने के बाद जब अटल विहारी वाजपायी की सरकार आयी तो पहली दफा देश में विनिवेश मंत्रालय की स्थापना की गयी और बड़े स्तर पर घाटे में चल रहे कंपनियों को बेचा गया। बाद में उसमे बड़े स्तर पर घोटाले भी हुए। अब फिर सरकार घाटे में चल रही कंपनियों को बेचने की तैयारी में हैं।

सरकार इसके पीछे इन कंपनियों के घाटे में चलने का तर्क देकर अपना पल्ला बेशक झाड़ ले, लेकिन इससे वह जवाबदेही से नहीं बच सकती कि जब सरकार के कहे अनुसार नोटबंदी से अथाह कालाधन बैंकों में आ चुका है तो इस धनराशि से क्या पोस्टरबाजी ही की जाएगी या ऐसी कपनियों को घाटे से उबारने के प्रयास किए जाएंगे?जाहिर है नोटबंदी से कालाधन उगाही के दावे भी जुमला ही हैं वर्ना केन्द्र सरकार को विदेशों से और कर्जा नहीं लेना पड़ता।

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