5 दिन दूध के साथ इसका सेवन करने से शरीर की सारी कमजोरी रफूचक्कर हो जाएगी

लखनऊ: दोस्तों आज हम आपको बताएंगे गोंद के फायदे पुरुषों के लिए बबूल का गोंद बहुत ही फायदेमंद दवा है। इसके इस्तेमाल से पौरुष बढ़ता है बबूल का गोंद गर्मी के मौसम में एकत्रित किया जाता है। बबूल के तने में कहीं भी काट देने पर जो सफेद रंग का एक पदार्थ निकलता है। उसी को गोंद कहा जाता है यह मार्केट में किसी भी दुकान पर आपको बहुत ही आसानी से मिल जाएगा। सामान्य मात्रा में गोंद का सेवन 5 से 10 ग्राम तक किया जाता है बबूल के गोंद के इस्तेमाल करने से छाती नर्म व मुलायम हो जाती है। यह अमा-शय को शक्तिशाली बनाता है और आंतो को मजबूत बनाता है।

यह सीने के दर्द को खत्म करता है और गले की आवाज को भी साफ कर देता है। इसका प्रयोग फेफड़ों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है इससे शरीर में धातु की पुष्टि होती है। तथा इससे वी-र्य बढ़ता है। इस के छोटे-छोटे टुकड़े घी, खोया और चीनी के साथ भूनकर खाने से शरीर शक्तिशाली हो जाता है। इसके इस्तेमाल से शरीर में चुस्ती-फुर्ती व ताजगी आती है। गर्मियों में इसके इस्तेमाल से आप लू से भी बच सकते हैं।

बबूल के गोंद के फायदे

खांसी में बबूल के गोंद को मुंह में डालकर चूसने से खांसी ठीक हो जाती है। विवाहित जीवन में बबूल के गोंद को घी में अच्छे से भूनकर उसका कोई भी पकवान बनाकर सेवन करने से मनुष्य को विवाहित जीवन का परम आनंद मिलता है। कमर दर्द के लिए बबूल की छाल, फली व गोंद एक बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार इसका सेवन करने से कमर दर्द में बहुत आराम मिलता है।

अगर सिर में बहुत दर्द हो रहा है तो पानी में बबूल के गोंद को घिसकर सिर पर लगाने से सिर का दर्द तुरंत दूर हो जाता है। मधुमेह के रोगी को बबूल के गोंद का चूर्ण पानी के साथ या फिर गाय के दूध के साथ दिन में रोजाना तीन बार लेने से मधुमेह रोगी को बहुत लाभ मिलता है। पुरुष और स्त्री दोनों की कमजोरी में बबूल के गोंद को घी में तलकर उसका पाक बना कर खाने से पुरुषों की ताकत बढ़ता है। और प्रसुत काल स्त्रियों को खिलाने से उनकी शक्ति भी बढ़ती है।

शरीर में कही भी जल जाएं तो उसपर बबूल के गोंद को पानी में घोलकर बॉडी के जले हुए उस स्थान पर लगाने से जलन दूर हो जाती है। शक्ति को बढ़ाने के लिए बबूल के गोंद को घी में भूनकर उसमें दुगनी मात्रा में चीनी डालकर मिक्स कर लें। इसे रोजाना 20 ग्राम की मात्रा में लेने से शक्ति में वृद्धि हो जाती है। बवासीर में बबूल का गोंद, कहरवा समई और गेरू दस-दस ग्राम लेकर पीसकर इसका चूर्ण बना लें। इसके 1 से 2 ग्राम चूर्ण को गाय के दूध की छाछ (मठ्ठा) में मिलाकर दो से तीन हफ्ते तक पिए यह बादी बवासीर और खूनी बवासीर दोनों रोगों में बहुत ही लाभकारी होता है।

मासिक धर्म अनियमित होने पर सौ ग्राम बबूल का गोंद कड़ाही में भूनकर इसका चूर्ण बनाकर रख लें। फिर इसमें से 10 ग्राम की मात्रा में गोंद मिश्री के साथ मिलाकर इसका सेवन करने से मासिक धर्म की पीड़ा दूर हो जाती है। और माहवारी भी नियमित रूप से टाइम पर आने लगती है। दस्त हो जाने पर बबूल के गोंद को तीन ग्राम से लेकर छ ग्राम की मात्रा में सुबह व शाम पीने से दस्त में एक ही दिन में फायदा होने लगता है। पेट और आंतों के घाव में बबूल का गोंद पानी में घोलकर पीने से अमाशय आंतो के घाव व पीड़ा खत्म हो जाती है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper