6 नवम्बर: तैयार हैं हम

लखनऊ: क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर राजधानी लखनऊ का इकाना स्टेडियम अपनी शानदार मौजूदगी दर्ज कराने को तैयार है। वेस्टइंडीज के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट मुकाबले को जिस तरह कानपुर के ग्रीन पार्क से छीनकर इकाना लखनऊ लाया गया, वह काफी रोचक है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के लिए लखनऊ और कानपुर में स्पर्धा पहले भी रही है, लेकिन तब ग्रीन पार्क के मुकाबले लखनऊ का इकलौता केडी सिंह बाबू स्टेडियम होता था। इस बार ग्रीन पार्क पर भारी पड़ा है नवनिॢमत इकाना, जो विश्वस्तरीय सुविधाओं के मामले में ग्रीन पार्क से कई कदम आगे है। यही नहीं इंग्लैंड के लॉड्र्स मैदान से भी बाजी मारी है इकाना ने। इकाना की कहानी और भविष्य पर निगाह डाली है आलोक निगम ने।

नवाबी शहर लखनऊ एक नई इबारत लिखने को तैयार है। 6 नवम्बर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 मैच होने के साथ ही लखनऊ स्पोट्र्स हब बन जाएगा और यूपी का रुतबा समूचे खेल जगत में कायम हो जाएगा। दरअसल, वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने एक सपना देखा और वह सपना था देश के सबसे बड़े सूबे में एक भव्य और इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम बनाने का। इस पर काम शुरू हुआ और बिड्स में नाम निकला इकाना का। सरकार की तरफ से जमीन मुहैया कराई गई और इकाना ने क्रिकेट स्टेडियम बनाने में दिन-रात एक कर दिए। नतीजा यह हुआ कि इंटरनेशनल लेवल का यह स्टेडियम अपने तय समय से भी काफी पहले बनकर तैयार हो गया। इकाना के पास 35 बरस की लीज वाला यह स्टेडियम न सिर्फ कानपुर के ग्रीन पार्क से, बल्कि इंग्लैंड के लॉड्र्स स्टेडियम से भी सुविधाओं के मामले में कोसों आगे है। अब तो सबकी नजर बस इसी पर है कि 6 नवम्बर को होने वाला मैच दिल जीत ले।

दरअसल भारत का राष्ट्रीय खेल भले ही हॉकी हो, लेकिन क्रिकेट के प्रति भारतीयों की दीवानगी किसी से भी छुपी नहीं है। गली-मोहल्लों में क्रिकेट खेलते बच्चे हों, या बड़े-बड़े मैदानों में खेलते युवा, हर किसी पर क्रिकेट का खुमार छाया रहता है। उत्तर प्रदेश भी इसमें पीछे नहीं है। यहां के लोगों में भी क्रिकेट का क्रेज बहुत ज्यादा है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में कई छोटे-बड़े स्टेडियम और क्रिकेट एकेडमी हैं। लेकिन जब बात इंटरनेशनल क्रिकेट मैच की आती है, तो निगाहें कानपुर स्थित ग्रीन पार्क स्टेडियम पर टिक जाती हैं। हालांकि करीब 24 बरस पहले आखिरी बार 1994 में लखनऊ स्थित केडी सिंह बाबू स्टेडियम में टेस्ट मैच खेला गया था, लेकिन इसके बाद इंटरनेशनल क्रिकेट का सेंटर लखनऊ से कानपुर शिफ्ट हो गया। अब 24 साल के लंबे इंतजार के बाद लखनऊवासी एक बार फिर इंटरनेशनल क्रिकेट के लुत्फ उठाने जा रहे हैं, दीपावली से ठीक एक दिन पहले 6 नवम्बर को। लखनऊ के नवनिॢमत इकाना स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले जाने वाले तीन टी-20 मैचों की श्रृंखला का दूसरा मैच खेला जाएगा।

हालांकि इस मैच की मेजबानी के लिए नवनिॢमत और आधुनिक सुविधाओं से युक्त इकाना स्टेडियम का मुकाबला कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम से था, लेकिन अपनी सुविधाओं की वजह से इकाना ने बाजी मार ली। इसके साथ ही 6 नवम्बर को जहां क्रिस गेल पहली बार उत्तर प्रदेश के स्टेडियम में अपने बल्ले का कमाल दिखाएंगे, वहीं जबरदस्त फॉर्म में चल रहे टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली भी अपने चौके-छक्कों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।

लॉड्र्स को भी पीछे छोड़ा : जिन देशों में क्रिकेट खेला जाता है वहां पर स्टेडियम हैं, लेकिन सबसे शानदार क्रिकेट स्टेडियम इंग्लैंड के लॉड्र्स को माना जाता है। लाड्र्स वह ऐतिहासिक मैदान है, जहां पर खेलना हर क्रिकेटर का सपना होता है। लेकिन इकाना स्टेडियम की पिच, बनावट और डिजाइन को लाड्र्स से भी शानदार माना जा रहा है। इसे विश्व का सबसे अच्छा स्टेडियम बताया जा रहा है। इस स्टेडियम में एक साथ 50 हजार दर्शक मैच देख सकते हैं, जबकि इंग्लैंड के लाड्र्स में केवल 30 हजार दर्शक एक साथ मैच देख सकते हैं। दिलीप ट्रॉफी सहित कई मैच इस स्टेडियम में खेले भी जा चुके हैं।

दो तरह की मिट्टी से बनी हैं पिचें : कुल 9 पिचों वाले इस स्टेडियम में दो तरह की मिट्टी से क्रिकेट पिचें बनाई गई हैं। इनमें चार पिचें लाल मिट्टी की हैं, जबकि एक काली मिट्टी की पिच है। पिचें बनाने के लिए लाल मिट्टी मुंबई से, जबकि काली मिट्टी ओडिशा के कटक से लाई गई है।

जगमगाएगा इकाना : डे-नाइट मैच में भरपूर रोशनी के लिए इकाना स्टेडियम की बाहरी दीवार से सटे छह पोल बनाए गए हैं, जिन पर 560 बल्ब लगे हैं। इसमें दो किलोवाट के 120-120 बल्बों के दो पोल, 90-90 और 70-70 बल्बों के दो पोल हैं। लाइट जाने पर व्यवधान हो, इसके लिए सभी बल्ब जेनरेटर से जलाए जाएंगे। रोशनी के लिए सबसे ऊंचा पोल 80 मीटर ऊंचा है। छह नवम्बर को होने वाला टी-20 मैच पूरा फ्लड लाइट में खेला जाएगा। यह पहला मौका है, जब इकाना में पूरा मैच फ्लड लाइट में होगा।

स्टेडियम की खासियत : 530 करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार हुए इकाना स्टेडियम में एक साथ 50,000 लोगों को बैठाया जा सकता है। इंटरनेशनल खेल मानकों पर खरा उतरा यह अत्याधुनिक स्टेडियम है। मात्र 2 वर्ष 8 महीने में बनकर तैयार हुए इस स्टेडियम की डिजाइन, नवाचार और भव्यता नवाबी शहर के चेहरे पर एक बड़ा प्रभाव डालती है। यह स्टेडियम 2016 में बनकर तैयार हुआ था। रात के मैचों के लिए इस स्टेडियम में विश्वस्तरीय रोशनी होगी। इसके अलावा इकाना में प्राइवेट जिम, टीवी स्टूडियो, हॉस्टल, रेस्टोरेंट के साथ हर वह सुविधा उपलब्ध है जो एक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में होनी चाहिए। इस स्टेडियम में बैठकर मैच देखने से ऐसा महसूस होगा जैसे आप विदेश में मैच देख रहे हों।

1994 में हुआ था आखिरी इंटरनेशनल मैच : लखनऊ में बना केडी सिंह बाबू स्टेडियम इंटरनेशनल क्रिकेट मैच का वेन्यू रह चुका है। इस मैदान पर 1987 में वनडे और 1994 में टेस्ट मैच खेला गया था। 1994 के बाद से इंटरनेशनल क्रिकेट का सेंटर लखनऊ से कानपुर शिफ्ट हो गया था। इसी कमी को दूर करने के लिए 2014 में लखनऊ में इंटरनेशनल लेवल के नए स्टेडियम का प्रोजेक्ट लाया गया। यूपी की तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने प्राइवेट कंपनी इकाना से हाथ मिलाते हुए इस प्रोजेक्ट को शुरू कराया। इस स्टेडियम के लिए सिर्फ जमीन यूपी सरकार ने मुहैया करवाई है। बाकी कंस्ट्रक्शन से लेकर फैसिलिटी और अन्य डेवलपमेंट कार्य इकाना कंपनी ने कराया है। इस स्टेडियम को बनाने के लिए 3 साल का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन कंस्ट्रक्शन 2 साल 8 महीने में कंप्लीट हो गया।

स्टेडियम में 650 गाडिय़ों को इंट्री : स्टेडियम में मीडिया, ब्रॉडकास्टिंग टीम, वीआईपी, वीवीआईपी, दोनों टीमें और मैच ऑफिशियल के ही चौपहिया वाहन जा सकेंगे। स्टेडियम में केवल 650 चौपहिया वाहनों को ही प्रवेश दिया जाएगा। हालांकि यहां से दो किमी के दायरे में तीन से चार ओला-उबर प्वॉइंट बनाए जाएंगे। इसके साथ ही दर्शकों की सुविधा के लिए शहर में इकाना के लिए 50 बसें चलेंगी। ये बसें चारबाग, एयरपोर्ट तिराहा, मुंशी पुलिया, बीकेटी, मडिय़ांव, तेलीबाग स्थित शनि मंदिर, हजरतगंज, अलीगंज, कपूरथला, अवध अस्पताल और बाराबंकी से मिलेंगी।

एक नजर में इकाना

– 71 एकड़ में बना यह स्टेडियम विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस है, जिसमें 40 वीआईपी बॉक्स हैं।
– इकाना में किसी भी खिलाड़ी की डोप टेस्टिंग जांच के लिए एक अलग लैब है, जिसमें जरूरत पडऩे पर तुरंत जांच भी कराई जा सकती है।
– प्लेयर्स के लिए स्टीम बाथ, आइस बॉक्स जैसी फैसिलिटी भी हैं।
– स्टेडियम के पाॄकग एरिया में 1000 से ज्यादा कार और 5000 से ज्यादा टू-व्हीलर पार्क करने की जगह है।
– इस स्टेडियम में 40 टॉयलेट इंटरनेशनल लेवल के हैं, जो एयरपोर्ट में बनने वाले टॉयलेट से बड़े हैं।
– स्टेडियम में सिटिंग अरेंजमेंट ऐसा है कि हर एंगल से मैच एक जैसा नजर आएगा।
– इस स्टेडियम में 6 फ्लड लाइट्स और 1800 वर्ग फीट की दो स्क्रीन लगी हैं। यानी आप मैदान के किसी भी कोने से मैच का लुत्फ उठा सकते हैं।
– स्टेडियम का ड्रेनेज सिस्टम इस तरह बना है कि बारिश होने की दशा में बारिश रुकने के 15 मिनट में मैदान खेल के लिए तैयार हो जाएगा।
– मेन ग्राउंड और दर्शकदीर्घा के बीच 10 फीट चौड़ी जगह छोड़ी गई है। बारिश की स्थिति में पानी मैदान से ड्रेन होकर यहीं आएगा।
– सिटिंग के लिए 8 अलग बॉक्स हैं-आईसीसी, पवेलियन, कमेंट्रेटर, मिडिया सेंटर, कॉरपोरेट, स्पेशल गेस्ट, कैमरा, अम्पायर और जनरल पब्लिक बॉक्स।
– विश्वस्तरीय ड्रेसिंग रूम और मीडिया सेंटर इसे अन्य स्टेडियम से खास बनाता है।
– देश के अन्य स्टेडियम में जहां क्रिकेटरों और दर्शकों के बीच एक जाली की दीवार होती है, वहीं इकाना स्टेडियम में ऐसा कुछ भी नहीं है। यहां मैच देखकर आपको लगेगा कि कहीं विदेश में हैं।

– बीसीसीआई के क्यूरेटर शिव कुमार का कहना है कि इस स्टेडियम की पिच वल्र्ड क्लास है। उनके मुताबिक इकाना की पिच पर बल्लेबाजी करने का अलग ही मजा होगा। इसकी पिच बैटिंग पिच है। उत्तर प्रदेश की राजधानी में बना यह स्टेडियम भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे अच्छे स्टेडियमों में से एक है। इस मैदान की आउटफील्ड बेजोड़ है और ड्रेनेज सिस्टम भी बेहतरीन है।

– अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर आरपी सिंह, जो लखनऊ के निवासी हैं, कहते हैं कि शहर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए बहुत बड़ा तोहफा है। शहर में रहने वाला हर क्रिकेट प्रेमी इस मैच के आयोजन से बहुत खुश है।

मैच रेफरी : इंग्लैण्ड के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर क्रिस ब्रॉड
मैदान में अंपायर : अनिल चौधरी और ओ. नंदन
थर्ड अंपायर : शम्सुद्दीन (हैदराबाद)
फोर्थ अंपायर : अनिल दांडेकर (मुंबई)

उदय सिन्हा से बातचीत

इकाना बनेगी प्लेयर्स की फैक्टरी

लखनऊ का इकाना स्टेडियम 6 नवम्बर को क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय मैप पर आ जाएगा। इस यात्रा के जनक हैं इकाना के प्रबंध निदेशक उदय सिन्हा। जो अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर उत्साहित हैं। उनका ड्रीम यह भी है कि इकाना से खिलाडिय़ों की वह खेप निकले, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक और दमक पैदा करे। उदय सिन्हा के संकल्पित सपनों की उड़ान पर बातचीत की है लखनऊ ट्रिब्यून के फीचर एडिटर आलोक निगम ने। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश :

– 6 नवम्बर को आप अपने लिए हर्ष का विषय समझते हैं या गर्व का?
मेरे लिए गर्व और हर्ष दोनों का दिन है 6 नवम्बर। शहर में इतना बड़ा मैच होने जा रह००ा है और लोग क्रिकेट को एंज्वॉय करेंगे। 24 साल के बाद यह मौका आया है।

-गर्व किस बात का महसूस कर रहे हैं? इसलिए कि 24 साल बाद मैच होने जा रहा है और हर्ष किस बात का है?
लोग क्रिकेट एंज्वॉय करेंगे।

– बचपन में आपकी किस खेल में रुचि रही है?
बचपन में मैंने बहुत से खेल खेले। क्रिकेट खेला, हॉकी खेला, टेबल टेनिस खेला।

लेकिन सबसे ज्यादा रुचि किस खेल में थी?
रुचि तो मेरी सबसे ज्यादा हॉकी में रही है।

हॉकी में आपकी रुचि थी, तो फिर क्रिकेट की तरफ कन्वर्ट हुए?
– अब यह तो ऊपरवाले पर है। उसको क्रिकेट कराना था, तो करा दिया। हो सकता है कि आने वाले समय में हॉकी के लिए भी कुछ बने। बचपन में तो मुझे हॉकी इतना पसंद था कि अपने पापा के साथ स्पोट्र्स कॉलेज गया था, हॉकी में एडमिशन लेने के लिए।

– स्पोट्र्स सिटी बनाने का विचार आपको कब और क्यों आया?
स्पोट्र्स सिटी तो सरकार का प्रोजेक्ट है। हम लोगों ने भी बिड्स फाइल किया था, साथ ही और लोगों ने भी बिड्स डाली थीं। हालांकि किस्मत हमारे साथ थी, इसलिए हमें स्पोट्र्स सिटी बनाने का मौका मिल गया।

– आप इकाना में एकेडमी भी बना रहे हैं? इसकी सफलता का आपका मापदंड क्या है?
इसकी सफलता का मापदंड यह है कि यहां जो प्लेयर्स खेलेंगे, वे भारतीय टीम में खेलेंगे। तभी एकेडमी को सफल माना जाएगा।

– उसके लिए किस लेवल पर तैयारी कर रहे हैं?
इसके लिए हम लोग नेशनल लेवल पर कई लोगों से टाईअप कर रहे हैं। इसमें हम लोग बेस्ट स्पोट्र्सपर्सन बनाएंगे।

– इसमें कुछ नाम आए हैं क्या?
नाम तो बहुत सारे आए हैं। आने वाले समय में आपको इनके बारे में पता चलेगा।

– आपकी स्पोट्र्स सिटी और एकेडमी की खासियत क्या है?
यहां सारे स्पोट्र्स हैं। इसमें क्रिकेट ग्राउंड है। इनडोर स्टेडियम है। टेनिस, लॉन टेनिस, टेबल टेनिस, बास्केटबाल, वॉलीबाल जैसे सभी खेलों के लिए अलग-अलग जगह है। कहने का मतलब यह है कि सारी सुविधाएं एक ही जगह हैं।

– अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधा का यह स्टेडियम तो बना लिया, लेकिन इतना वक्त क्यों लगा इंटरनेशनल मैच होने में?
नहीं, इंटरनेशनल मैच होने में कोई वक्त नहीं लगा। दो साल आठ महीने में हमने स्टेडियम बनकर तैयार हुआ है। आईसीसी ने पिछले साल नवम्बर में भी मैच आयोजित किया था। उस समय दो-चार चीजें उन्होंने बताई थीं। उन्हें पूरा कर लिया गया। वैसे भी आईसीसी से अप्रूवल मिलने में ही 6-7 महीने लग जाते हैं। ऐसा नहीं है कि हमारे एक बार कहने से ही आईसीसी की टीम आ जाएगी। आईपीएल के पहले हम लोगों ने अप्लाई किया था कि अब आकर चेक कर लीजिए। इसके बाद उनकी टीम अब आ पाई और अब जब आईसीसी का अप्रूवल हुआ है, तब यहां मैच होने को हरी झंडी मिली।

– इसीलिए आईपीएल भी आपको नहीं मिला था?
हमारा स्टेडियम तो आईपीएल के समय ही तैयार था, लेकिन उस समय तक आईसीसी की टीम ने दौरा नहीं किया था।

– आपको कितने प्रयास करने पड़े कि यहां पर इंटरनेशनल मैच हो सके?
राजीव शुक्ला जी ने काफी कोऑर्डिनेट किया। सारी चीजें उन्होंने ही कीं। उन्होंने ही आईसीसी टीम को विजिट कराया।

– अगर ऐसा था, तो आप आईपीएल भी करा सकते थे?
नहीं, जब तक आईसीसी नहीं अप्रूव करती है, कोई मैच नहीं करा सकते। आईसीसी का अप्रूवल जरूरी है।

– जब राजीव शुक्ला सपोर्ट कर रहे थे, तो वह इस चीज को भी कर सकते थे?
़उन्हीं के प्रयासों से ही तो आईसीसी की टीम आई थी। नहीं तो एक-दो साल तक नहीं आती। उनकी वजह से ही आईसीसी की टीम ने तीन-चार महीने में ही दौरा करके यहां की चीजों को अप्रूव किया। जब आईसीसी की टीम ने विजिट किया, उसके एक महीने के बाद उनकी रिपोर्ट आई। इसके बाद बीसीसीआई की टीम आई।

– 6 नवम्बर को जो मैच हो रहा है, उसको लेकर बतौर एक खेल प्रेमी आपके अंदर कितना जोश और उमंग है?
एक्साइटमेंट तो बहुत ज्यादा है कि यहां पर इंटरनेशनल मैच हो रहा है। लेकिन और भी बहुत सारी बातें दिमाग में चलती रहती हैं कि बेस्ट तरीके से मैच हो जाए और किसी तरह की कोई समस्या न हो। खुद एंज्वॉय करने से ज्यादा इस बात की फिक्र है कि अच्छे से यह आयोजन हो जाए।

– तो क्या इस स्टेडियम को आप अपनी प्रेमिका मान रहे हैं?
थोड़ा-बहुत तो मानते हैं।

– आप कोई और बड़ी लकीर खींचने की कोशिश में हैं?
कोशिश नहीं इसे पैशन कह सकते हैं। मैं जो बड़ी लकीर खींचने की कोशिश में हूं, वह यह है कि मैं प्लेयर्स के लिए बेस्ट सुविधाएं दूं, जिससे यहां पर प्लेयर्स की फैक्टरी बन जाए। यहां से मैं प्लेयर्स पैदा करूं।

– पहली बार अंतरराष्ट्रीय मैच यहां होने जा रहा है। इस शहर के आप मानिंद व्यक्ति हैं। बहुत से लोगों से आपका संपर्क होगा। कितना दबाव आप झेल रहे हैं?
पास का दबाव तो बहुत ज्यादा है। बाकी तो ऐसा कोई दबाव नहीं है। बाकी सबका तो बहुत कोऑर्डिनेशन है। सरकार भी बहुत सहयोग कर रही है। जहां तक पास को लेकर दबाव की बात है, तो यह पहला अनुभव है इसलिए ऐसा है।

– देखिए मैंने 6 नवम्बर से बात शुरू की थी। अब 6 नवम्बर पर ही बात खत्म भी करते हैं। जब 6 नवम्बर को मैच हो जाएगा, सफलतापूर्वक ही होगा। तो मैच खत्म होने के बाद और दूसरे दिन जो सूर्योदय होगा उसके बीच में आपके मन में क्या विचार चलते रहेंगे?
यह तो 6 तारीख को पता चलेगा, आज कैसे कुछ कह सकते हैं।

– आपने एक बात कही कि आप यहां एक फैक्टरी लगा रहे हैं, खिलाडिय़ों की। तो इस फैक्टरी की बुनियाद कब पड़ेगी और कब तक फैक्टरी से खिलाड़ी बाहर आना शुरू होंगे?
एक साल के अंदर फैक्टरी की बुनियाद पड़ जाएगी। 3 से 4 साल के अंदर यहां के खिलाडिय़ों को इंटरनेशनल लेवल पर खेलते पाएंगे।

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