BSNL की हालत हुई बदतर ,पौने दो लाख कर्मचारियों का वेतन बंद

दिल्ली ब्यूरो: सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल के हालात बद से बदतर हो रहे हैं। कंपनी का घाटा इतना बढ़ गया है कि इतिहास में पहली बार कंपनी अपने कर्मचारियों को वेतन देने में समक्ष नहीं है। ख़बर के अनुसार बीएसएनएल ने अपने 1.68 लाख कर्मचारियों को फरवरी महीने का वेतन नहीं दिया है.

कंपनी के कर्मचारियों ने मोदी सरकार से मदद की अपील भी की है। कर्मचारियों की यूनियन ने दूरसंचार मंत्रालय को पत्र लिखा है। यूनियन ने आरोप लगाया है कि रिलायंस जियो की बेहद सस्ती दरों पर मोबाइल सेवा की वजह से पूरी टेलीकॉम इंडस्ट्री बेहाल हो गई है। इसका असर बीएसएनएल पर भी हुआ है।

कर्मचारियों ने सरकार से अपील करते हुए कहा है कि कर्मचारियों का वेतन जारी किया जाए. ग़ौरतलब है कि बीएसएनएल लगातार घाटे में डूब रही है। साल 2017 में कंपनी को 4786 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था. 2018 में यह घाटा 8 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया। ख़बरों के मुताबिक बीएसएनएल के बोर्ड ने प्रस्ताव दिया था कि वह बैंक से लोन लेकर कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करे, लेकिन दूरसंचार मंत्रायल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है।

ग़ौरतलब है कि कंपनी लंबे से घाटे में चल रही थी, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि कंपनी अपने कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं दे पा रही है। रिलांयस जियो के बाजार में आने के बाद टेलीकॉम कंपनी के बाजार पर गहरा असर पड़ा है। बीएसएनएल के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने केरल, जम्मू कश्मीर, ओडिशा और अन्य कॉरपोरेट कार्यालयों में कर्मचारियों को फरवरी माह का वेतन देना शुरू कर दिया है। अधिकारी ने आगे कहा कि कर्मचारियों को वेतन भुगतान में देरी इसलिए हो रही है, क्योंकि सरकार ने कोई वित्तीय सहायता नहीं दी है। इसलिए जैसे-जैसे कंपनी को आय होगी, कर्मचारियों का वेतन भुगतान कर दिया जाएगा।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper