मोदी-मोदी चिल्लाने वाले खुद ही पढ़ लें कैसे रहे इनकी सरकार के चार साल!

अखिलेश अखिल

पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार 26 मई को चार पूरा कर लेगी। चार साल की सरकार की स्थापना दिवस को लेकर मोदी सरकार पूरे देश में जलसा करने जा रही है और अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने को तैयार है।सरकार बनाने से पहले और बाद में मोदी सरकार ने देश के लोगों से बहुत कुछ कहा था। देश की तस्वीर बदल देने की बातें कही थी। अच्छे दिन के वादे किये थे। नौकरी ,की बाते की थी। सबके खाते में 15 लाख रुपये देने की बाते कही थी। जनता लटटू हो गयी थी। लेकिन अब जब चार साल गुजर गए और अगले साल फिर चुनाव होने की शुरुआत हो गयी है ,जनता निराश है। जनता कह रही है कि कुछ भी तो नहीं बदला। जनता की अपनी बातें हो सकती है लेकिन बीजेपी को एक उपलब्धि यह जरूर मिली कि चार साल में उसकी सरकार 20 राज्यों तक पहुँच गयी।

बीजेपी के खाते में चाहे जितनी उपलब्धि मिली हो लेकिन सच तो यह भी है चार साल में यह सरकार हमेशा विवादों में ही रही। पीएम मोदी पर खूब हमले हुए और विपक्षी दलों ने चार साल के विवाद को खूब भुनाने की कोशिश भी की। पीएम मोदी से जुड़ा सबसे बड़ा विवाद उनकी डिग्री को लेकर सामने आया। दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने अप्रैल 2016 में पीएम मोदी की डिग्री को लेकर सवाल उठाए थे। मोदी के डिग्री विवाद में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने दिसंबर 2016 में 1978 के डीयू रिकॉर्ड की पड़ताल करने का निर्देश दिया था।

सीआईसी ने दिल्ली विश्वविद्यालय को वर्ष 1978 में बीए पास करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड की पड़ताल करने का निर्देश दिया था। डीयू के अनुसार, पीएम मोदी ने इसी साल बीए की परीक्षा पास की थी। डीयू ने सीआईसी के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे रखी है। देश की जनता जातक नहीं जान पायी कि वाकई में पीएम मोदी की डिग्री की असलियत क्या है।

आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने का मामला इन दिनों काफी गर्माया हुआ है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू मोदी सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आ गए है। हालांकि अभी तक टीडीपी ने भाजपा से गंठबंधन नहीं तोड़ा है लेकिन नायडू आए दिन खुलकर मोदी का विरोध कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना भी भाजपा से अलग हो गई और 2019 में अपने दम पर चुनाव लड़ने की घोषणा की।

साल 2017 में डोकलाम विवाद सुर्खियों में रहा। भारत और चीन के रिश्तों में सीमा विवाद को लेकर तल्खी भी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई। दोनों देश की सेनाएं भारत-भूटान और चीन की सीमा पर डटी रहीं और करीब दो महीने बाद यह विवाद सुलझा। विवाद सुलझने के कुछ माह बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन का दौरा भी किया। वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार पर तंज कसा और प्रधानमंत्री के 56 इंच के सीने पर सवाल उठाए।

सिलेब्रिटी ज्वेलर और अरबपति डायमंड मर्चेंट नीरव मोदी ने पंजाब नैशनल बैंक से 11,360 करोड़ रुपए का घोटाला किया और भारत से फरार हो गया। नीरव मोदी को लेकर विपक्ष ने पीएम मोदी पर निशाना साधा और कहा कि पहले माल्या और फिर ललित मोदी और अब नीरव मोदी। बता दें कि विजय माल्‍या पर भी बैंकों का करीब 9000 करोड़ का कर्ज बकाया है। भारतीय एजेंसियां कुछ कर पाती विजय माल्‍या ने उससे पहले ही देश छोड़ दिया। इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार को जमकर विरोध का सामना करना पड़ा। वहीं ललित मोदी को लेकर सुषमा स्वराज पर कई तरह के आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने ललित को भारत से बाहर जाने में मदद की। विपक्ष ने इस पर काफी हंगामा किया था और सुषमा के इस्तीफे की मांग की थी।

गुजरात विधानसभा चुनावों के बाद एक बार फिर से सभी विपक्षी दलों ने ईवीएम मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया था। विपक्ष का आरोप था कि मशीनों से छेड़छाड़ कर उनके वोट भाजपा ने ले लिए हैं। हाल ही में हुए कर्नाटक चुनाव के भी जब शुरुआती रूझान आए तो कांग्रेस ने ईवीएम से छेड़छाड़ का राग छेड़ा था लेकिन जैसे ही कांग्रेस को ज्यादा वोट मिले तो विपक्ष ने इस पर चुप्पी साध ली।

सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी और इसके तहत मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की जगह शुरुआती जांच की बात कही थी। लेकिन कोर्ट के इस फैसले को अलग ही रूप दे दिया गया और दलित सड़कों पर उतर आए। दलितों के भारत बंद के दौरान काफी नुकसान हुआ और कई लोगों की जान भी गई। विपक्ष ने इस मामले में भी राजनीति की और इस दौरान हुई हिंसा के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

भारतीय इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार 4 जज मीडिया के सामने आए और देश में न्यायपालिका की हालत को लेकर चिंता जाहिर की। जज जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रंजन गोगोई ने मीडिया से बातकर शीर्ष अदालत के प्रशासन में अनियमितताओं पर सवाल खड़े किए थे। जजों के इस तरह सामने आने पर विपक्ष ने केंद्र को घेरा था कि इतिहास में आजतक ऐसा नहीं हुआ लेकिन मोदी राज में न्यायधीश भी न्याय मांग रहे हैं।

विवाद तो नोटबंदी से लेकर जीएसटी को लेकर भी खुब हुए। आधार कार्ड को लेकर तमाम तरह की बाते सामने आयी। मोदी सरकार की आलोचना पनामा और पैराडाइज पेपर लिक को लेकर भी की गयी। इस मामले में देश भर के कई नेताओं और बड़े हस्तियों के नाम टैक्स हैवन देश में धन जमा करने की बाते सामने आयी थी। पीएम मोदी ने इसकी जांच निष्पक्ष कराने की बातें कही थी लेकिन अभी तक उसकी जांच कहाँ तक पहुंची है किसी को कुछ पता नहीं।

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