भूखे-प्यासे रह कर गंगा की निमर्लता की पुकार करते-करते सदा के लिए सो गये स्वामी सानंद

द लखनऊ ट्रिब्यून. न्यूज डेस्क। पिछले 22 जून से गंगा की अविरलता और निर्मलता की खातिर विशेष एक्ट पास कराने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने आखिरकार गुरुवार को शरीर त्याग दिया। उन्होंने दोपहर बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में आखिरी सांस ली। वह अपना शरीर एम्स को दान कर गए हैं।

एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने इस बात की पुष्टि की है। डॉक्टरों के मुताबिक कमजोरी और हार्ट अटैक से स्वामी सानंद का निधन हुआ। बुधवार को उन्हें मातृसदन से जबरन उठाकर एम्स में भर्ती कराया गया था। सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से वार्ता विफल होने के बाद उन्होंने मंगलवार से जल भी त्याग दिया था। वह जब से अनशन पर थे जल और शहद ही ले रहे थे।

प्रोफ़ेसर जीडी अग्रवाल आईटियन थे और अपनी सेवाएं कानपुर आईआईटी को दी थीं। उन्होंने गंगा की रक्षा के लिए अपनी तरफ से तैयार ड्राफ्ट के आधार पर एक्ट बनाने के लिए 13 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, लेकिन पत्र का कोई जवाब न आने पर वह 22 जून को अनशन पर बैठ गए थे।

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