IAS की तर्ज पर जल्द ही IJS भी होगी शुरू! सोमवार को CJI और PM की मीटिंग

अखिल भारतीय न्यायिक सेवा यानी ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विसेज (AIJS) पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबड़े, कानून और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद और विधि सचिव समेत इस मामले से जुड़े कई अन्य अधिकारियों की बैठक सोमवार को होगी. ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विसेज पर राज्यों का जवाब आने के बाद पूरे देश में निचली अदालतों में एक परीक्षा के जरिए न्यायिक मजिस्ट्रेट पद पर नियुक्ति के लिए बैठक में होगी चर्चा.
सीजेआई और कानून मंत्री के साथ होने वाली इस बैठक के बाद ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विसेज पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. बैठक में इस नए सिस्टम यानी आईएस, आईपीएस और आईआरएस की तर्ज प आईजेएस का भी रास्ता साफ होगा. दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस बैठक में शामिल होंगे.

इससे पहले ‘एजेंडा आजतक’ के आठवें संस्करण के दौरान रविशंकर प्रसाद ने पहले ही ऐलान किया था कि केंद्र सरकार जल्द ही ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा का प्रस्ताव लाने वाली है. रविशंकर प्रसाद ने तभी कहा था कि मैं ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विस की परीक्षा का प्रस्ताव लाने वाला हूं. आईएस, आईपीएस की परीक्षा अलग से हो सकती है तो ज्यूडिशियल की क्यों नहीं हो सकती? रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि यह परीक्षा यूपीएससी (केंद्रीय लोक सेवा आयोग) कंडक्ट करे और सुप्रीम कोर्ट उसकी निगरानी करे. इस प्रक्रिया से देश के बेस्ट छात्र चुनकर आएंगे और कल को वो एडीजे बनेंगे, डिस्ट्रीक्ट जज बनेंगे. हाई कोर्ट आएंगे. इसमें एस/एसटी को रिजर्वेशन भी मिलेगा. इसे लाने की कोशिश चल रही है.

गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने नवंबर 2016 में केंद्र सरकार को भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवा की तर्ज पर न्यायिक पालिका में भर्ती के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (एआईजेएस) का गठन करने के मुद्दे पर विचार करने के निर्देश दिए थे. हाई कोर्ट ने ये निर्देश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया था. भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के प्रवक्ता अश्वनी उपाध्याय की तरफ से लगाई गई इस याचिका मे कहा गया था कि इस प्रकार से न्यायिक पालिका में योग्य व प्रतिभावान लोगों की भर्ती आसान होगी.

अधिकतम सरकारी विभागों भर्ती के लिए अखिल भारतीय सेवा का गठन है जबकि न्यायपालिका में भर्ती के लिए राष्ट्रीय स्तर की चयन प्रक्रिया नही है. याचिका में इस बात का भी जिक्र किया गया था कि विधि आयोग ने तीन बार यानि पहली, 8वीं और 116 रिपोर्ट में भारतीय न्यायिक सेवा (आई जे एस) और सुप्रीम कोर्ट ने दो बार यानि 1991 में और उसके बाद 1992 में अखिल भारतीय न्यायाधीशों के मामले में आईजेएस के गठन का समर्थन किया है.

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