मनोरंजन और व्यायाम की अनूठी पाठशाला में बुजुर्गों संग युवाओं ने दी दस्तक

लखनऊ: व्यायाम को अगर थोड़ा मनोरंजक तरीके से किया जाए तो खुद को फिट रखना काफी आसान हो सकता है। वहीं इस बार बुजुर्गों की फिटनेस का ध्यान रखते हुए और उन्हें उनके बचपन के दिन याद दिलाने के लिए 14 अप्रैल को मोटिवेजेर्स क्लब ने अपने 17वें इवेंट का आयोजन जनेश्वर मिश्र पार्क में किया। इस बार की थीम व्यायाम और मनोरंजन में बुजुर्गों और युवाओं ने दी दस्तक रखी गई। कार्यक्रम की शुरुआत क्लब की फाउंडर मेंबर आस्था सिंह ने फिटनेस के कुछ मन्त्र बताते हुए किया वहीँ क्लब के फॉउंडर गौरव छाबड़ा ने क्लब के सीनियर सिटिजंस से आज के समय में और पुराने समय में आये बदलाव से हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ रहे हैं और कैसे हम इसे बेहतर बना सकते हैं इस बारे मे उनसे अपने विचारो को साझा करने को कहा।

वहीं चर्चा का हिस्सा बनते हुए क्लब के मेंबर किशोर शाह ने बताया कि पहले के समय ये जिम और तमाम तरह के मशीनों की सुविधा नहीं होती थी लेकिन तब व्यायाम शालाएं होती थी जहां दण्ड बैठक कराया जाता था। वहीँ एस पी निगम ने बताया कि आज के समय में बच्चे थोड़ा सा भी पैदल नहीं चलते लेकिन हमारे समय में कई किलोमीटर पैदल चलते हुए स्कूल जाते थे जिससे हमारा अच्छा व्यायाम भी हो जाता था। डी के पांडे ने बताया कि बच्चो को अकेले छोड़ना आज सुरक्षित नहीं होता पहले इतना डर नहीं था लेकिन बात यह भी है कि आजकल बच्चे न पैदल चलना चाहते हैं और न ही कुश्ती जैसे खेलों में हिस्सा लेना चाहते हैं। क्लब के कुछ सीनियर सिटिजंस का कहना था कि पहले कब्बडी, खो-खो, लंबी कूद जैसे खेल होते थे जिससे काफी अच्छी कसरत हो जाती थी लेकिन आजकल बच्चों का मनोरंजन फोन से ही हो जाता है।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए कुछ शारीरिक खेलकूद कराए गए जिसमें बुजुर्गों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया इसके साथ ही रोज़ाना जीवन में खुद को स्वस्थ रखने के कुछ टिप्स भी दिए गए।वहीँ आज के कार्यक्रम में उस वक्त क्लब के बुजुर्गों के चेहरे पर ख़ुशी की अलग ही झलक देखने को मिली जब उनके लिए क्रिकेट, बैडमिंटन और फुटबॉल जैसे खेल कराए गए।

सीनियर सिटिजंस की लेमन रेस

यह वो समय था जब सब अपने अपने बचपन के दिनों में मानो खो से गए हों दरअसल स्कूल के बाद अपने कामधंधों में व्यस्त होने और फिर जिम्मेदारियों को पूरा करते करते कब बुढ़ापा आ गया अंदाजा ही नहीं लगा। लेकिन आज एक बार फिर बरसों बाद मोटिवेजेर्स क्लब ने बचपन के दिन याद दिला दिए। मुंह में चम्मच दबाए और उसपर नींबू को बैलेंस करते हुए जीतने की होड़ में सभी बुजुर्ग रेस में शामिल हो गए मानो किसी ने उनका बचपन वापस ला दिया हो। हालाँकि बैलेंस बनाते हुए रेस में सबसे आगे रहने वाले सुरेश सिंह इस गेम के विजेता रहे।

बुजुर्गों में दिखी बैडमिंट्न मैच जीतने की होड़

बैडमिंटन डबल्स और सिंगल्स दोनों खिलाए गए जिसमें सभी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। गेम के रूल्स वैभव सिंह और करण ने बताए। शानदार प्रदर्शन करते हुए डबल्स में आर के सिंह व वी के गुप्ता और गोविन्द गुप्ता व आर आर सिंह के बीच मैच हुआ जिसमें आर आर की टीम विजेता रही।

जब लंबे समय बाद बुजुर्गों ने थामा क्रिकेट का बल्ला

क्लब के सीनियर सिटिजंस को दो टीमों में बांटा गया और क्रिकेट खेलने की जब बारी आई तो सभी पूरे जी जान से अपनी टीम को जिताने में जुट गए। वहीँ क्रिकेट मैच के लिए क्लब के सबसे वरिष्ठ मेंबर एच सी खरे (87वर्ष) और शिखर यदुवंशी को अंपायर बनाया गया जिन्होंने पूरे मैच के स्कोर और पारी का ध्यान रखा।

सुई धागा रेस

क्लब की फाउंडर मेंबर प्रिशित राठी और इशिता चौहान ने सुई धागा रेस के रूल बताए। सुई धागा रेस मे सुई लेकर अपने दूसरे पार्टनर के पास भागकर जाना और सुई में धागा डालकर अपनी जगह पर जल्दी से आना था हालाँकि प्रयास तो सभी ने बेहतरीन किया लेकिन मधू गुप्ता और राधा रानी पाल ने इस रेस में पहला स्थान प्रात को जीत हासिल की।

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