अहमदाबाद बम धमाकों का मास्टर माइंड अब्दुल सुभान कुरैशी गिरफ्तार

नई दिल्ली : गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में साल 2008 में सीरियल बम ब्लास्ट करने का मास्टर माइंड अब्दुल सुभान कुरैशी दिल्ली पुलिस के हथ्थे चढ़ा है. देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों से मिली खबरों के आधार पर उसे दिल्ली पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर से गिरफ्तार किया है. पुलिस ने उसे शनिवार को उस समय दबोच लिया जब वह एक कार से दिल्ली आ रहा था.

भारत के लादेन के नाम से कुख्यात इस संदिग्ध आतंकी को खुफिया विभाग की सूचना पर स्पेशल सेल ने दबोचा. फिलहाल उसे 14 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है. 26 जनवरी से पहले हुई उसकी गिरफ़्तारी को दिल्ली पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.पुलिस के मुताबिक कुरैशी का नाम 2008 में गुजरात में हुए सीरियल बम विस्फोट के मास्टर माइंड के तौर पर वांछितों की सूचियों शामिल था.

कुरैशी की तलाश उस वक्त शुरू हुई जब 26 जुलाई 2008 को गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में 21 बम विस्फोट हुए थे. दिल्ली पुलिस के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने बताया है कि कुरैशी प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) और आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन को फिर से ऐक्टिव करने दिल्ली आया था. इसी ने रियाज भटकल के साथ मिलकर इंडियन मुजाहिदीन की स्थापना की थी. सिमी और इंडियन मुजाहिदीन के लिए फंड जुटाने में इसकी प्रमुख भूमिका थी. गाजीपुर में गिरफ्तारी के दौरान दिल्ली पुलिस को इसके पास से एक ऑटोमेटिक गन मिली है.

नेपाल में डाले था कुरैशी डेरा

अब्दुल कुरैशी के नाम की घोषणा गुजरात पुलिस की तरफ से संदिग्ध के तौर पर उस वक्त जारी हुई जब एक टेलीविज़न चैनल को अमेरिकी नागरिक के वाईफाई कनेक्शन का इस्तेमाल करते हुए ई-मेल भेजा गया था। कुरैशी उर्फ तौकीर की तलाश दिल्ली, बेंगलुरू और 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेन में हुए विस्फोट में भी थी। इस खूंखार आतंकी की गिरफ्तारी को लेकर गुजरात के एंटी टेरर स्क्वॉड (एटीएस) और अहमदाबाद अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) लगातार दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के अधिकारियों के संपर्क में थी।

दिल्ली पुलिस के डीसीपी प्रमोद  कुशवाहा ने कुरैशी की गिरफ्तारी के बारे में और ज्यादा जानकारी दी। अब्दुल कुरैशी सुरक्षा एजेंसियों की एक दशक की मेहनत के बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा है। गुजरात के अहमदाबाद में साल 2008 में हुए सीरियल ब्लास्ट में अब्दुल मोस्ट वांटेंड था। डीसीपी कुशवाहा की ओर से बताया गया है कि अब्दुल पिछले कई वर्षों से नेपाल में जाली दस्तावेजों के आधार पर रह रहा था।

सऊदी होकर आया है कुरैशी

गणतंत्र दिवस के अवसर पर तौकीर की गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस और आईबी के लिए बड़ी कामयाबी है। अब सुरक्षा एजेंसियां इस बात का पता लगा रही हैं कि उसके साथी कौन-कौन थे। दिल्ली पुलिस के मुताबिक कई ब्लास्ट का आरोपी कुरैशी का क्रिमिनल प्रोफाइल काफी बड़ा है। वह अंग्रेजी माध्यम के अच्छे स्कूल से पढ़ा है और कई कंपनियों में इंजिनियर रह चुका है। एनआईए ने कुरैशी पर 4 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। कुरैशी ने 2007-08 में सिमी के 4 ट्रेनिंग कैंप बनाए थे। पुलिस के मुताबिक कुरैशी फर्जी दस्तावेजों के सहारे नेपाल में छिपा हुआ था। जब भारत में इंडियन मुजाहिदीन की टॉप लीडरशिप खत्म हो गई तो वह भारत लौटा।

डीसीपी कुशवाहा ने बताया कि बीच में कुछ समय के लिए कुरैशी सऊदी भी गया था। इंडियन मुजाहिदीन और सिमी के लिए टेरर फंडिंग के लिए उसने सऊदी में करीब 2 साल बिताए। भारत में बड़ा नेटवर्क खड़ा करने के लिए वह वापस लौटा। पुलिस के मुताबिक कुरैशी दिल्ली में किसी से मिलने आया था। उसके पास से कुछ फेक डॉक्युमेंट्स मिले हैं।

कई बम धमाकों से जुड़ें हैं कुरैशी के तार

स्पेशल सेल के सूत्रों के अनुसार, बिहार के बोधगया में दो दिन पहले मिले बम वाले मामले से भी उसके तार जुड़े हो सकते हैं। उससे गहन पूछताछ की जा रही है। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब्दुस की गिरफ्तारी शनिवार रात ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के गाजीपुर से की गई है। वह यूपी के रास्ते दिल्ली में दाखिल हुआ। वह 2008 में गुजरात के अहमदाबाद और सूरत में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में भी मोस्ट वॉन्टेड था। वर्ष 2008 के बाद से वह न केवल भारत के अलग-अलग राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, यूपी, बिहार, कर्नाटक, केरल में जाकर छुपा, बल्कि लंबे वक्त तक नेपाल में भी रहा था।

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