पढ़िए ढोला मारू की प्रेम कहानी

नई दिल्ली: राजस्थान की मिट्टी वीरो के शौर्य और बलिदान के लिए मशहूर नहीं हैं बल्कि कई प्रेम कहानियां भी हैं। यहां कभी एक वेश्या ने अपने प्रेम के लिए पूरी सल्तनत को चुनौती दी तो कभी एक दासी के रूप के आगे राजा नतमस्तक हो गया। राजस्थान की सबसे चर्चित प्रेम कहानी ढोला-मारू की मानी जाती है। आज भी इस प्रेमी जोड़े का जिक्र यहां के लोकगीतों में होता है। कहा जाता है कि नरवर के राजा नल के तीन साल के पुत्र साल्हकुमार का विवाह बचपन में उस समय के जांगलू देश अब बीकानेर के पूंगल नामक ठिकाने के स्वामी पंवार राजा पिंगल की पुत्री से हुआ था। बाल विवाह होने के कारण दुल्हन ससुराल नहीं गई थी। व्यस्क होने पर राजकुमार की एक और शादी कर दी गई। राजकुमार अपनी बचपन में हुई शादी को भूल चुके थे। उधर जांगलू देश की राजकुमरी अब सयानी हो चुकी थी। उसके माता-पिता उसे ले जाने के लिए नरवर कई संदेश भेजे, लेकिन कोई भी संदेश राजकुमार तक नहीं पहुंचा।

राजकुमार की दूसरी पत्नी राजा पिंगल द्वारा भेजे गए संदेश वाहकों को मरवा डालती थी। उसे इस बात का डर था कि राजकुमार को अगर पहली पत्नी के बारे में कुछ भी याद आया तो उसे छोड़कर वो पहली के पास चले जाएंगे। इसका सबसे बड़ा कारण पहली राजकुमारी की सुंदरता थी। उधर राजकुमारी साल्हकुमार के ख्वाबों में खोई थी। एक दिन उसके सपने में सल्हाकुमार आया इसके बाद वह वियोग की अग्नि में जलने लगी। ऐसी हालत देख उसकी मां ने राजा पिंगल से फिर संदेश भेजने का आग्रह किया, इस बार राजा पिंगल ने एक चतुर ढोली को नरवर भेजा।

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