ट्रांसप्लांट के लिए अब बाहर क्यों जाना, पीजीआई और केजीएमयू है न

लखनऊ ट्रिब्यून ब्यूरो : अब राजधानी लखनऊ में भी अंगों का प्रत्यारोपण करना संभव हो सकेगा। मरीजों को इस साल के अंत तक यह सौगात मिल जाएगी। हालांकि अभी पीजीआई में लीवर और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों का प्रत्यार्पण तो हो रहा है, लेकिन संसाधनों की कमी के चलते मरीजों को कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता है।

पीजीआई में तो स्थिति यह है कि अंग प्रत्यार्पण में 200 से ज्यादा मरीजों की वेटिंग लिस्ट हमेशा रहती है। इतना ही नहीं, नंबर नहीं आने के चलते कई मरीजों की तो मौत तक हो जाती है। जिन मरीजों के पाद भरपूर पैसा होता है, वह दिल्ली-गुणगांव जैसे शहरों के बड़े अस्पतालों में चले जाते हैं। लोगों की परेशानियों को देखते हुए योगी सरकार ने केजीएमयू में ट्रांसप्लांट सेंटर के लिए 200 करोड़ भी स्वीकृत कर दिए हैं।

इसके अलावा पीजीआई ने भी ट्रांसप्लांट सेंटर के लिए स्टेट बैंक से लोन लिया है। पीजीआई में ट्रांसप्लांट सेंटर बन जाने से एक साथ कई मरीजों का अंग प्रत्यर्पण किया जा सकेगा। सेंटर में इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट से उपकरणों और दवा की तुरन्त आपूॢत हो सकेगी। ट्रांसप्लांट सेंटर में ब्रेन व हार्ट स्टेशन बनाए जाएंगे। यहां हार्ट के साथ ब्रेन हेमरेज के शिकार मरीजों के ब्रेन में जमे खून को निकालने के लिए इंजियोग्राफी की जा सकेगी।

दूसरी ओर, केजीएमयू में अंग प्रत्यारोपण में लीवर व किडनी के साथ ही हार्ट और फेफड़ों का भी ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा। इसके लिए गोमतीनगर में जगह भी ले ली गई हैजहां 500 बेड और जोड़कर सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल बनाया जाएगा।

केजीएमयू और पीजीआई में ट्रांसप्लांट सेंटर बनने के बाद लखनऊ पूरे देश के लिए मॉडल मेडिकल हब बन जाएगा। इतना ही नहीं, पीजीआई में रोबोट के माध्यम से रोबोटिक सर्जरी भी की जाएगी। इसके लिए एक रोबोट खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पीजीआई में लीवर, किडनी और पैंट्रियाज के ट्रांसप्लांट के अलावा ब्रेन व हार्ट के स्टेशन बनाए जाएंगे।

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